Friday, March 12, 2010 2:46:14 AM
HOME |LOGIN |E-PAPER |NEWSLETTER |FEEDBACK |ABOUT US |CONTACT US |SITEMAP |RATE CARD |RSS 
Advertisements
 *  काम पर मांगेंगे वोट नीतीश *  नसीमा व मृत्युंजय को मिला अवार्ड *  मुकेश व लक्ष्मी दुनिया के टॉप10 अमीरों में *  भारत ने चिली को दिये 50 लाख डॉलर *  भारत-पाक के बीच छद्म युद्ध नहीं चाहता अफ़गान *  नेपाल के 11 जिलों में बर्ड फ्लू का खतरा *  नक्सल विरोधी अभियान जारी रहेगा : आइजी *  राज्य को 1894 बैंक शाखाओं की जरूरत *  आइपीएल तीन का रोमांच आज से *  इंग्लैंड को हरा जर्मनी फ़ाइनल में
मुख्यपृष्ठ रांची जमशेदपुर धनबाद देवघर पटना कोलकाता सिलीगुड़ी
Citizen Journalist
Forum
Railway Time Table
Flight Details
Jharkhand Politics
स्वामी भीमानंद ने धर्म व अध्यात्म की आड़ में सेक्स रैकेट चला कर पिछले 10 सालों में 125 करोड़ की कमाई की
Other Headline 
Prabhat Khabar
जंगल कथा
Feb 3 2010 10:52:11:403PM

Change font size: | 

Print

E-mail

Comments

Rating

Bookmark

टाइगर हावेन के बरामदे में पड़ी अठारहवीं सदी की विक्टोरियन कुर्सी पर बैठे बिली अर्जन सिंह मुझे हमेशा पढ़ते हुए मिले, आस-पास तमाम मेजों पर ढ़ेरो देशी-विदेशी किताबें व पत्रिकायें। जंगल के मध्य एक बेहद जीवन्त व खूबसूरत बसेरा  बाघों एंव मनुष्य दोनों का। यह आदमी और जानवर के मध्य सहजीविता का अदभुत नमूना था, पर अब न ही वहां विक्टोरियन फ़र्नीचर है और न किताबें, यदि कुछ बचा हुआ दिखाई देता है तो टाइगर हावेन की दीवारों पर लगी "काई" जिसे इस बार की आई भीषण बाढ़ अपने साथ वापस ले जाना भूल गयी, या यूं कह ले की सुहेली नदी व जंगल को यह मालूम हो चुका था कि अब उनका रखवाला उनसे अलविदा कहने वाला है! हमेशा के लिए।
इसी लिए उस रोज टाइगर हावेन  खण्डहर सा बस धराशाही होने को तैयार दिखाई दे रहा था, और सुहेली ठहरी हुई नज़र आ रही थी।

बिली जवानी के दिनों में यह जगह कभी नही छोड़ते थे, चाहे जितनी बारिश हो, फ़िर उस वक्त सुहेली में गाद (सिल्ट) भी नही थी। पर उम्र बढ़ने की साथ-साथ सुहेली में सिल्ट बढ़ती गयी, हर बारिश में दुधवा व टाइगर हावेन दोनों जल-मग्न होने लगे, नतीजतन बिली बरसात के चार महीने जसवीन नगर फ़ार्म पर बिताने लगे और टाइगर हावेन से पानी निकल जाने पर फ़िरपने प्रिय स्थान पर वापस लौट आते अपनी किताबों के साथ।
लेकिन इस बार बाढ़ के चले जाने के बाद भी अब बिली कभी नही लौटेगें, यही नियति है इस स्थान की। बिली की उम्र के साथ ही टाइगर हावेन ने भी अपनी जिन्दगी पूरी कर ली। जहां इस इमारत में आजकल आतिश-दान में आग जलती थी, बिली के प्रिय तेन्दुओं व बाघिन तारा और कपूरथला के राज-परिवार की तस्वीरें लगी थी, कमरों मे पुस्तके समाती नही थी, वही सब-कुछ वीरान है । अगर कुछ है तो बाढ़ के द्वारा छोड़े गये वीभत्स निशान।


इस वर्ष बिली की तबियत खराब होने के बावजूद वो बाढ़ गुजर जाने के बाद दो बार यहां आये, और कहा कि लगता है, मेरे साथ ही टाइगर हावेन भी नष्ट हो जायेगा!...............नियति की मर्ज़ी वह इस वर्ष यहां नही लौट पाये...........अब यह जगह की अपनी कोई तकदीर नही है जिसके हवाले से इसके वजूद को स्वीकारा जा सके।
बिली के सेवकों के मुताबिक बिली अर्जन सिंह के उत्तराधिकारियों का इरादा यहां एक बेहतरीन इमारत बनाने का है, जोकि बिली के द्वारा जिम कार्बेट की तरह स्वंम बनाई गयी इस रचना का अस्तित्व मिटा देगी।
रामनगर में जिस तरह जिम कार्बेट का घर हूबहू एक स्मारक में तब्दील किया गया है उसी तरह बिली की इस प्रयोगशाला के साथ होना चाहिए। यह थाती है बिली की जिस पर उन सभी का अधिकार है जो प्रकृति की प्रयोगशाला को अपनी इबादतगाह मानते है।

मेरी कुछ स्मृतियां है उस महात्मा के सानिध्य की जिनका जिक्र जरूरी किन्तु भावुक कर देने वाला है। वो हमेशा नीबू पानी पिलाते, दुधवा और उसके बाघों को कैसे सुरक्षित रखा जाय बस यही एक मात्र उनकी चिन्ता होती। दुधव के वनों की जीवन रेखा सुहेली नदी की बढ़ती सिल्ट को लेकर एक विचार था उनका- सुहेली कतरनिया घाट वाइल्ड-लाइफ़ सैंक्चुरी में बह रही गिरवा नदी से जोड़ दिया जाय। इससे दो फ़ायदे थे, एक कि दुधवा में आती बाढ़ पर नियन्त्रण और दूसरा दुधवा में गैन्गेटिक डाल्फ़िन एंव घड़ियाल की आमद हो जाना।

चूंकि अभी तक दुधवा टाइगर रिजर्व में ये दोनॊं प्रजातियां नही है जबकि कतरनियां घाट डाल्फ़िन और घड़ियाल की वज़ह से आकर्षण का केन्द्र है। साथ ही इन प्रजातियों के आवास को भी विस्तार मिल सके, यही ख्वाइस थी बिली की। उन्होंने मुझसे कहा था संपर्क में रहना वह कई संस्थाओं और सरकार को इस बारे में लिख चुके हैं। एक आस्ट्रेलियाई संस्था का पत्र भी मुझे दिखाया था। वो अक्सर कहते यदि  दुधवा के लिए कुछ करना है, तुम यहां आकर रहो लखीमपुर बहुत दूर है, मैनें नौकरी करने की बात बताई तो बोले तबादला करवा लो।
ट्रेन से बाघों का कटना उनके लिए कौतूहल की बात थी, मैं और दुधवा के निदेशक जी०सी मिश्र से इस बारे में चर्चा करते हुए कहा, कि बाघ जैसा समझदार जानवर ट्रेन की दूर से आती गड़गड़ाहट को कैसे नही भांप पाता है! वह अचम्भित थे।
बिली के बाघिन व तेन्दुओं का दुधवा के जंगलों में सफ़ल पुनर्वासन एक महान वैश्विक घटना थी ्जिसे कुछ लोगों ने बदनाम करने की कोशिश की, जबकि आनुंवशिकी विज्ञान की नज़र में उनका यह प्रयोग दुधवा के बाघों को इन-ब्रीडिंग से बचाकर जीन-विविधिता का कारण बना। जिससे यहाम के बाघों की प्रजाति और बेहतर होगी।

बिली के अन्तिम सम्मान में दुधवा टाइगर रिजर्व के प्रशासन ने बिली अर्जन सिंह, (जो प्रणेता थे इस पार्क के), से अपने संबधों का दायित्व बड़ी खूबसूरती से अदा कर दिया उन्हे गार्ड-आफ़-आनर देकर, किन्तु हमारी सरकारों ने कोई आदर्श नही स्थापित किए इस महान शख्सियत की अन्तिम विदाई में यह दुखद व निन्दनीय है।


वाइल्ड लाइफ़ प्रोटेक्शन सोसाइटी की प्रमुख बेलिन्डा राइट ने मुझे संदेस भेजकर खुसी जाहिर की, कि बिली साहब के की अन्तिम विदाई में वन-विभाग ने महती भूमिका अदा की।
प्रसिद्ध वन्य-जीव विशेषज्ञ अशोक कुमार ने भी दिल्ली में इस बात पर आवाज़ उठाने की बात की है कि बिली का स्मारक स्थापित किया जाय।
एक और सन्देश था मेरे लिए कि " बिली जी के बाद हर नया साल तुम्हे तुम्हारी जिम्मेदारी याद दिलायेगा, जहां तुम अपने आप को और मजबूत पाओगे।

वन्य-जीव संरक्षण विधा के द्रोणाचार्य कुंवर अर्जन सिंह को मेरी भाव-भीनी श्रद्धांजली।

 

http://krishnakumarmishra.blogspot.com/

नाली साफ करा दो, लोग गिरने वाले हैं...
भगवान के नाम पत्रः...
लड़की बनादो...
दुधवा के जंगल...
बीवी बड़ी या ब्लॉग?...
भ्रष्टाचार उन्मूलन सप्ताह आज से? सतर्कता जागरूकता सप्ताह...
मेरे बारे में कुछ भी लिखने लायक नहीं...
कौन है प्रोग्रेसिव, बताइए...
राखी की खूबसूरती...
ना आना इस देश...लाडो...
चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है......
बदनाम बस्ती की लाचार बेटियां...
मै पागल नही हूँ भाई...
ये देश है मेरा......
जातीय हिंसा की ओर उत्तर प्रदेश...
नहीं भाई, भगवान बुद्ध को ऐसा मत कहो...
नयना नहीं बदरा बरसाऒ...
रांची विवि = देख तमाशा देख...
सीधी खरी बात......
एक चिट्ठी मां के नाम...
...और निर्माता ने अमिताभ को भगा दिया...
आचार संहिता और प्राकृतिक आपदा...
मंदी की आशंकाओं के बीच सबक का मौसम...
आओ स्कूल चलें हम...
आओ स्कूल चलें हम...
मुक्तिदाता का हत्यारा !...
आपके गुरुजन दुष्ट प्रवृत्ति के होंगे !...
अच्छा तो अब हम चलते हैं...
चपरासी से उपअध्यक्ष...
रसायन मे नोबल पुरस्कार...
भारतीय ब्लॉग्स और ब्लॉगर्स का फ़ोरम...
अपराध का नया रूप:मोबाइल हैकिंग...
सेलफोन करेगा आपकी सेहत की निगरानी...
आतंकवादियों ने बुधवार रात देश की औद्योगिक...
मुंबई पर आतंकी हमला, 101 की मौत...
Contact Us | Advertisement | Archive | Todays News | Style Book | Corporate Mail
© Copyright of Prabhat khabar | Terms & Conditions of Reading | Privacy and Cookie Policy
Site best viewed in IE 6.0
Developed & Designed By