हजारीबाग जिले के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ी है. फ्लोराइडयुक्त जल का इस्तेमाल पेयजल के रूप में किया जा रहा है. पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल (हजारीबाग) ने जिले के 10 प्रखंडों में लगे कई चापानलों के जल के नमूनों की जांच करायी. जांच में कई चौकानेवाले तथ्य सामने आये. अधिकतर जगहों पर फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक पायी गयी. संबंधित विभाग के पदाधिकारियों के अनुसार हजारीबाग के अधिकतर स्थानों पर निर्धारित मात्रा से अधिक फ्लोराइड की मात्रा पायी गयी है. दूषित जल पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं. चिकित्सकों के अनुसार फ्लोराइड युक्त जल के सेवन से बच्चे व प्रौ़ढ़ कई गंभीर बीमारी के शिकार हो रहे हैं. हड्डी व दांत से संबंधित रोग बढ़े हैं. जांच के दौरान केरेडारी प्रखंड में 14, बड़कागांव में पांच, बरही में सात, विष्णुगढ़ में सात, कटकमसांडी में तीन, चुरचू में चार और सदर में तीन चापानलों के जल में निर्धारित मात्रा से अधिक फ्लोराइड पायी गयी.  हजारीबाग जिले में 10 हजार से अधिक चापानल विभाग द्वारा लगाये गये हैं. इनमें से 10 प्रतिशत चापानल के जल का नमूना जांच के लिए इकट्ठा किया गया था. शहर के एक भी चापानल के जल का नमूना इकट्ठा नहीं किया गया. |