रांची : राज्य में 100 करोड़ रुपये का अलकतरा घोटाला हुआ है. सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों और इंजीनियरों ने मिल कर इस घोटाले को अंजाम दिया है.इसके लिए तेल कंपनियों द्वारा अलकतरा बेचे जाने से संबंधित फरजी चालान तैयार किया गया है.दूसरे राज्यों के ठेकेदारों के नाम पर जारी किये गये चालान के आधार पर झारखंड के ठेकेदारों को भुगतान किया गया है.सिर्फ इतना ही नहीं केरोसिन के लिए जारी चालान का इस्तेमाल अलकतरा का भुगतान लेने के लिए किया गया है. एकीकृत बिहार में अलकतरा घोटाला पकड़ में आया था.घोटाले के अधिकांश मामले झारखंड क्षेत्र से जुड़े थे.राज्य विभाजन के बाद झारखंड सरकार ने अलकतरा घोटाले से बचने के लिए नया नियम लागू किया.इसके बावजूद झारखंड में अलकतरा घोटाला हुआ.महालेखाकार(एजी) ने इस घोटाले के सिलसिले में सरकार को एक पत्र भेजा है.इसमें घोटाले को अंजाम देने के लिए अपनाये गये तरीकों का उल्लेख किया गया है.महालेखाकार की रिपोर्ट में दर्शायी गयी गड़बड़ियां एजी ने पथ निर्माण विभाग के सात प्रमंडलों और ग्रामीण विकास विभाग के आठ प्रमंडलों में सड़क निर्माण से जुड़े दस्तावेज की जांच की. इसमें पथ निर्माण विभाग के हजारीबाग, जमशेदपुर, जामताड़ा, गिरिडीह, डालटनगंज, चाईबासा और चतरा प्रमंडलों के साथ ही ग्रामीण विकास विभाग के चक्रधरपुर, कोडरमा, लोहरदगा, जामताड़ा, जमशेदपुर, हजारीबाग, गिरिडीह और लोहरदगा प्रमंडल का नाम शामिल है. जांच में 125 सड़कों के काम को शामिल किया गया. इन सड़कों के निर्माण में 31858 मीट्रिक टन अलकतरे की जरुरत बतायी गयी थी. इसके लिए संबंधित प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं द्वारा 127 प्राधिकार पत्र जारी किये गये थे. इन्हीं प्राधिकार पत्रों के आधार पर ठेकेदारों द्वारा विभिन्न तेल कंपनियों से अलकतरा खरीदना था. सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों के सरकार से अलकतरा का भुगतान लेने से लिए तेल कंपनियों द्वारा जारी मूल चालान के बदले फोटो कॉपी जमा किया. कार्यपालक अभियंताओं ने भी गलत तरीके से फोटो कापी के आधार पर ही ठेकेदार को अलकतरे का भुगतान कर दिया. ठेकेदारों ने भुगतान पाने के लिए एक ही चालान की फोटो कापी का इस्तेमाल कई-कई बार किया.पाकुड़ में तो एक ठेकेदार ने केरोसिन के लिए जारी चालान पर अलकतरे का भुगतान ले लिया. ठेकेदार ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आइओसीएल) द्वारा जारी एक चालान जमा किया.चालान पर कंपनी का कोड ङ्ग20062121बी023565ङ्खलिखा हुआ था. जांच में पाया गया कि आइओसीएल ने मेसर्स केसरिया तेल कंपनी को बेचे गये 12 किलो लीटर केरोसिन तेल के लिए जारी किया था.केरोसिन के इस चालान पर ठेकेदार ने अलकतरा मद में 28 लाख रुपये का भुगतान लिया. चक्रधरपुर के एक ठेकेदार ने ओड़िशा स्मॉल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन से अलकतरा खरीदने का चालाना जमा 31 लाख रुपये का भुगतान ले लिया.अलकतरे की इस बिक्री के सिलसिले में ओड़िशा सरकार के वाणिज्यकर विभाग से जानकारी मांगी गयी.इसमें यह पाया गया कि चक्रधरपुर प्रमंडल से भुगतान के लिए जिस चालान का इस्तेमाल किया गया था उस चालान के जरिये राज्य के बाहर के किसी व्य िया संस्था को अलकतरे की बिक्री नहीं की गयी थी.अलकतरा के लिए राज्य में लागू नियमझारखंड सरकार ने मार्च 2001 में अलकतरा के सिलसिले में नया नियम लागू किया. इसके तहत किसी ठेकेदार को तेल कंपनियों से खुद ही अलकतरा खरीदना है. ठेकेदार को काम मिलने के बाद संबंधित प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अलकतरा खरीद के लिए प्राधिकार पत्र जारी करते हैं. इस प्राधिकार पत्र के आधार पर अलकतरा खरीद कर उसे कार्य स्थल या अपने गोदाम में रखने के 48 घंटे के अंदर कार्यपालक अभियंता को इसकी सूचना देनी है.कार्यपालक अभियंता या उनके अधिकृत प्रतिनिधि(सहायक अभियंता)द्वारा अलकतरा के पहुंचने की भौतिक सत्यापन की जानी है.साथ ही उसके गुणवत्ता की भी जांच की जानी है. मापी पुस्तिका(एमबी)में अलकतरे के इस्तेमाल की दर्ज मात्रा के मूल्य का भुगतान ठेकेदार को भुगतान करना है.ठेकेदार द्वारा अलकतरा खरीद का मूल चालान जमा किये जाने के बाद ही भुगतान का आदेश दिया जाना है. किसी भी स्थिति में फोटो कापी को आधार बना कर अलकतरे का भुगतान नहीं करना है. घोटाले में बिहार के तत्कालीन मंत्री जेल गये थे एकीकृत बिहार में हुए अलकतरा घोटाले में पथ निर्माण मंत्री इलियास हुसेन जेल गये थे.सीबीआइ ने उन्हें भी अलकतरा घोटाले में अभियुक्त बनाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था.अलकतरा घोटाले में फिलहाल वह जमानत पर हैं.एकीकृत बिहार में हुए अलकतरा घोटाले की जांच सीबीआइ ने की थी.इस घोटाले में कुल 13 मामले दर्ज किये गये थे.इनमें से नौ मामले झारखंड के क्षेत्र से जुड़े थे.सीबीआइ ने घोटाले में बिहार के तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री इलियास हुसैन को अभियुक्त बनाया था.जांच के बाद इंजीनियरों ठेकेदारों के साथ ही मंत्री के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया गया था.अलकतरा घोटाले के किसी मामले में अब तक फ़ैसला नहीं हो सका है.
 
 
37 ठेकेदारों ने फरजी चालान पर दिखायी खरीद व खपत
 
सड़क निर्माण में लगे  37  ठेकेदारों ने तेल कंपनियों के फरजी चालान पर 4370 मीट्रिक टन अलकतरा की खरीद और खपत दिखायी. एक ठेकेदार ने तो वैसे गुणवत्तावाले अलकतरा की खरीद और खपत दिखायी, जिस गुणवत्ता केअलकतरा का उत्पादन तेल कंपनी ने किया ही नहीं था. इतना ही नहीं, कुछ ठेकेदारों ने तो अलकतरा खरीदने से पहले ही उसे सड़क बनाने में उसका इस्तेमाल भी दिखाया.पथ निर्माण विभाग के जातमाड़ा प्रमंडल के 10 ठेकेदारों ने एक साल के अंदर ही फरजी चालान के सहारे 206 मीट्रिक टन अलकतरा की खरीद दिखायी. इन ठेकेदारों को जेजे रोड और मुर्गाबनी-राजनगर सड़क की विशेष मरम्मत का काम दिया गया था. इन्होंने फरजी कागजात के सहारे खरीदे गये अलकतरा का इस्तेमाल सड़क मरम्मत में करने का दावा किया और भुगतान भी लिया. इन ठेकेदारों ने अलकतरा की खरीद का जो चालान जमा किया था, उस पर 16 अंकों का ङ्गअल्फा न्यूमरिक कोडङ्ख दर्ज था. जबकि इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) द्वारा अलकतरा की बिक्री से संबंधित चालान पर 15 अंकों के ङ्गअल्फा न्यूमरिक कोडङ्ख का इस्तेमाल किया जाता है. आइओसीएल द्वारा जारी किये जानेवाले 15 अंकों के अल्फा न्यूमरिक कोड में बिक्री का वर्ष, स्थान सहित अन्य ब्योरे सांकेतिक शब्द व अंक में लिखे रहते हैं. पथ निर्माण विभाग के गिरिडीह,जमशेदपुर, जामताड़ा के अलावा ग्रामीण विकास विभाग के गिरिडीह, हजारीबाग, जमशेदपुर, कोडरमा और लोहरदगा के 26 ठेकेदारों ने आइसोसीएल से 867 मीट्रिक टन अलकतरा की खरीद का दावा किया. संबंधित ठेकेदारों द्वारा अलकतरा खरीद के लिए जमा किये गये चालान में सांकेतिक शब्द  ङ्गवीङ्ख, ङ्गडीङ्ख और ङ्गक्यूङ्ख जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. आइओसीएल के चालान पर लिखे जानेवाले अल्फा न्यूमरिक कोड में इन शब्दों का इस्तेमाल ही नहीं किया जाता है.  हजारीबाग और जमशेदपुर प्रमंडल में सड़क निर्माण के नाम पर एक ठेकेदार ने छह वर्षो में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) से 3296 मिट्रिक टन अलकतरा की खरीद से संबंधित चालान जमा किया और भुगतान लिया. मामले की जांच के दौरान यह पाया गया कि छह साल तक अलकतरा खरीदनेका दावा करनेवालने इस ठेकेदार ने सिर्फ मई 2007 में ही एचपीसीएल से अलकतरा खरीदा था. इस तरह इस ठेकेदार द्वारा छह वषरे में बनायी गयी सड़कों की स्थिति का अंदाज लगाया जा सकता है. इसी ठेकेदार ने मार्च 2007 और फरवरी 2008 में एचपीसीएल से 60/70 गुणवत्तावाले 392 मीट्रिक टन अलकतरा खरीदने और सड़क बनाने में इस्तेमाल करने का दावा किया. पर, मामले की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि इस अवधि में कंपनी के पास 60/70 गुणवत्तावाला अलकतरा था ही नहीं. इसलिए इसकी बिक्री का सवाल ही नहीं.हजारीबाग और कोडरमा ग्रामीण विकास  प्रमंडलों में ठेकेदारों ने अलकतरा खरीदने के पहले ही सड़क निर्माण में खर्च दिखाया है. हजारीबाग प्रमंडल में योजना संख्या 19एफ-2/05-06 में ठेकेदार ने एचपीसीएल के अलकतरा खरीदने के लिए प्राधिकार पत्र जमा किया. एचपीसीएल ने 21 मार्च 2006 को अलतरा बेचा, पर ठेकेदार ने खरीदने से एक दिन पहले ही 20 मार्च को सड़क निर्माण में अलकतरा खर्च दिखाया. प्रमंडल के इंजीनियरों ने 20 मार्च को मापी पुस्तिका (एमबी) में इस खर्च को दर्ज भी कर दिया. कोडरमा प्रमंडल की योजना संख्या 20एफ-2/05-06 में सड़क निर्माण के उद्देश्य से अलकतरा खरीदने लिए ठेकेदार ने एचपीसीएल में प्राधिकार पत्र जमा किया. कंपनी ने ठेकेदार से 16 और 18 मई 2007 को अलकतरा बेचा. पर, ठेकेदार ने 15 मई को ही अलकतरा खर्च दिखा दिया. प्रमंडल के इंजीनियरों ने ठेकेदार के इस दावे को मान भी लिया.
 
अलकतरा खरीद और इस्तेमाल में जालसाजी के नमूने
(1) कंपनी से अलग कोडवाले चालान (इनवायस)चालान-200242121बी000288 चालान-200242121बी000284चालान-200242121बी000898
(2) खरीद से पहले ही इस्तेमाल दिखायायोजना संख्या        खरीद की तिथि        खर्च दिखाया         मात्रा19एफ-2/05-06        21-03-2006        20-03-2006        14 एमटी20एफ-2/05-06        16-05-2007        15-05-2007        10 एमटी20एफ-2/05-06        16-05-2007        15-05-2007        12 एमटी20एफ-2/05-06        18-05-2007        15-05-2007        13 एमटी |