पटना : हिंदी साहित्य के विकास में कई बिहारी लेखकों का अहम योगदान है, लेकिन शायद ही किसी को मालूम है कि किसी भारतीय द्वारा लिखी गयी पहली अंगरेजी पुस्तक की रचना एक बिहारी ने की थी. उनका नाम है शेख दीन मोहम्मद. उनकी यह पुस्तक एक यात्रा संस्मरण थी. दीन मोहम्मद का जन्म 1759 में पटना के एक कुलीन मुसलिम परिवार में हुआ था. वह बंगाल के नवाबों के परिवार से थे. उनके पूर्वज मुगल शासकों के काल में प्रशासनिक सेवाओं में थे.सिर्फ 10 की उम्र में सेना मेंदीन मोहम्मद ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही ब्रिटिश इस्ट इंडिया कंपनी की बंगाल आर्मी से जुड़ गये. इस दौरान वह एक एंग्लो-आयरिश अफसर कैप्टन गॉडफ्रे बेकर के संपर्क में आये. इसके बाद उन्होंने बंगाल आर्मी में बतौर प्रशिक्षु सर्जन का काम शु किया. 1782 तक दीन ने सेना की इस यूनिट के साथ काम किया. इसके बाद उन्होंने कैप्टन बेकर के साथ आर्मी की सेवा से त्यागपत्र दे दिया. इस दौरान उनका बेकर परिवार के साथ संबंध प्रगाढ़ हो गया.भारत छोड़ आयरलैंड चले गयेसन 1784 में दीन मोहम्मद बेकर के परिवार के साथ आयरलैंड चले गये. उन्होंने आयरलैंड में अंगरेजी भाषा के अपने ज्ञान को सुधारने के लिए एक स्थानीय स्कूल में दाखिला ले लिया. वहां उनकी मुलाकात जेन डैली से हुई और धीरे-धीरे यह मुलाकात प्रेम में बदल गयी. 1786 में डैली के परिजनों के विरोध के बावजूद दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद उन्होंने इसलाम धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म ग्रहण कर लिया और इंग्लैंड के ब्रिजटन में जाकर बस गये. दीन मोहम्मद का निधन 24 सितंबर, 1851 में हुआ.द ट्रवेल्स ऑफ दीन महोमेट सन 1794 में दीन मोहम्मद ने अपनी यात्रा संस्मरण ‘द ट्रैवल्स ऑफ दीन महोमेट’ को प्रकाशित कराया. इसमें भारत के विभिन्न शहरों की यात्रा के बारे में वर्णन है.  साथ ही उन्होंने इसमें उस समय भारतीयों द्वारा किये गये विद्रोहों के बारे में विस्तार से चर्चा की है. इसके अलावा दीन मोहम्मद ने दो अन्य किताबें भी लिखीं.लंदन में खोला पहला भारतीय रेस्तरां दीन मोहम्मद ने न केवल अंगरेजी भाषा में किताब लिखी, बल्कि उन्होंने लंदन में जॉर्ज स्ट्रीट पर हिंदुस्तानी कॉफी हाउस नाम से पहला भारतीय रेस्तरां भी खोला. हालांकि उनका यह प्रयास असफल रहा.डॉक्टर ब्रिजटन बने दीन इंग्लैंड के  ब्रिजटन में दीन दंपती ने पहला मसाज पार्लर खोला. इस पार्लर में भाप के माध्यम से विभिन्न रोगों का इलाज किया जाता था. शीघ्र ही इस तकनीक ने लोगों का मन मोह लिया और दीन ब्रिजटन में ‘डॉक्टर ब्रिजटन’ के नाम से मशहूर हो गये. उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दीन मोहम्मद को उस समय किंग जॉर्ज चतुर्थ व विलियम चतुर्थ की सेवा में तैनात किया गया. इंग्लैंड  के लेखक माइकल एच फिशर ने 1996 में ‘द फर्स्ट इंडियन ऑथर इन इंग्लिश  दीन महोमेट’ के नाम से एक किताब भी लिखी. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने इसे प्रकाशित किया है. इस पुस्तक में दावा किया गया है कि दीन मोहम्मद पहले भारतीय अंगरेजी लेखक हैं. |