नयी दिल्ली : समलैंगिकता पर फ़ैसला देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को गलत बताते हुए समलैंगिकता को गैरआपराधिक करार दिया है. दिल्ली हाइकोर्ट ने यह ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया. हाइकोर्ट के अनुसार समलैंगिकता अपराध नहीं है.कोर्ट के अनुसार स्र्ी का स्र्ी से या पुरुष का पुरुष से सहमति से संबंध बनाना अपराध नहीं है. दिल्ली हाइ कोर्ट के अनुसार धारा 377 वैध नहीं है और यह मौलिक अधिकार का हनन है. अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है धारा 377 के अनुसार गे संबंध को कानून अपराध नहीं माना गया है. 1861 में अंग्रेजो ने यह कानून बनाया था. फ़िलहाल समलैंगिकता के कानून को गैरआपराधिक माना है लेकिन इसे कानूनी मान्यता देने का काम सरकार करेगी. समलैंगिको के हित के लिए लंबे समय से काम कर रही बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के अनुसार कोर्ट का यह फ़ैसला काफ़ी अहम है.अपने अपने तर्कइस कानून का विरोध करने वालों के अनुसार इससे समाज में व्याभिचार फ़ैलता है और समलैंगिकता से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा भी होता है.वहीं समलैंगिकता को कानूनी तौर पर मान्यता देनेवालों का कहना है कि इसे अगर कानूनी मान्यता मिल जाए तो समलैंगिकों को उनका हक मिलेगा और बेवजह पैसा उगाही और समलैंगिकों को डराने धमकाने की घटनाओं में कमी आयेगी.