नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए गुरुवार को झारखंड में राष्ट्रपति शासन छह महीनों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां संवाददाताओं को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बैठक में राज्यपाल की रिपोर्ट पर विचार के बाद यह फ़ैसला किया गया. झारखंड में 19 जनवरी से जारी राष्ट्रपति शासन की मियाद 18 जुलाई को खत्म हो रही थी. राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने 16 जून को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि राज्य में यथास्थिति बरकरार है और कोई भी दल या गंठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है.
 
ठंडी पड़ी सरकार बनाने की कवायद :  मंत्रिमंडल के इस निर्णय के साथ ही झारखंड में यूपीए की सरकार बनाने के लिए रांची और दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से जारी राजनीतिक गतिविधियां भी ठंडी पड़ गयी. झारखंड में मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितता की शुरुआत इस साल के आरंभ में हुई, जब मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने तमाड़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में अपनी हार के बाद पद से इस्तीफ़ा दे दिया. श्री सोरेन के उत्तराधिकारी के नाम पर यूपीए के घटक दलों झारखंड मुक्ति मोरचा, कांग्रेस और राजद के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण विधानसभा को निलंबित कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. पिछले आम चुनावों में श्री सोरेन दुमका लोकसभा सीट के अलावा जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भी विजयी रहे. इसके बाद से राज्य में फ़िर से सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और झामुमो के प्रयासों में तेजी आ गयी. पिछले कुछ दिनों से झारखंड के कांग्रेस और झामुमो के सभी दिग्गज नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए थे. विधानसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 73 है और ये नेता 40 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे थे.  दोनों दलों के राज्य स्तरीय नेताओं ने दो जुलाई को झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के केशव राव से भेंट की थी. इसके बाद श्री राव ने झामुमो प्रमुख श्री सोरेन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से इस संबंध में मुलाकात की थी. |