रांची : 34 वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन के नाम पर 37.06 करोड़ की गड़बड़ी की गयी है. प्रधान महालेखाकार (पीएजी) ने ऑडिट ऑब्जेक्शन पर राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति का जवाब सुनने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी है. प्रधान महालेखाकार ने पक्ष को नियम विरुद्ध मानते हुए अस्वीकार कर दिया है. रिपोर्ट में टिप्पणी की गयी है  किसी मंत्री या सरकारी अधिकारी को जनता का पैसा अपनी मर्जी से खर्च करने का वैधानिक अधिकार नहीं है.     
  साथ ही निगरानी से पूरे प्रकरण की जांच कराने की अनुशंसा की है. पीएजी आरके वर्मा ने सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने की पुष्टि की है.गलत फार्मूला तय किया थापीएजी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में लिखा है  एनजीओसी ने टेंडर के मूल्यांकन का गलत फार्मूला तय किया था. मनपसंद लोगों को काम देने के लिए टेंडर प्रक्रिया में ‘ पावर प्वाइंट  प्रेजेंटेशन’ को शामिल किया. इसमें सबसे ज्यादा अंक रखा. टेंडर कमेटी ने जिस सप्लायर को काम देना चाहा, उसे पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में सबसे ज्यादा अंक दे दिया. ऐसा करने से ‘ फाइलेंशियल  बिड ’ में कम अंक पानेवाले सप्लायरों का कुल अंक ज्यादा हो जाता था. इसके बाद उन्हें काम दे दिया जाता था. इस अनोखी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर फाइनेंशियल बिड में ‘एल-वन’ होनेवाले सप्लायरों को काम नहीं देकर ‘एल-टू’ या किसी अन्य को दे दिया जाता था. इस अनोखी टेंडर प्रणाली से खेल सामग्री की खरीद पर 10 करोड़ 99 लाख 54 हजार रुपये अधिक खर्च करना पड़ा. खेल सामग्री की खरीद के दौरान सप्लायरों की ओर से दिये गये 604.72 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी का नवीकरण नहीं किया गया.कैटरिंग के काम में 280.91 करोड़ का नुकसान कैटरिंग का काम देने में हुई गड़बड़ी से  280.91 करोड़ का नुकसान हुआ. इसके लिए मेसर्स गजल कैटर्स और कैटरिंग केयर ने टेंडर डाला था. टेक्िनकल बिड में दोनों को 30-30 अंक दिये गये. फाइनेंशियल बिड  में मेसर्स गजल को 15.06 और कैटरिंग केयर को 20 अंक मिले. मेसर्स गजल 781 रुपये प्रति खिलाड़ी की दर से खाना उपलब्ध कराना चाहता था. कैटरिंग केयर 381.84 रुपये प्रति खिलाड़ी की दर से. पर, पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में मेसर्स गजल को 41.14 और कैटरिंग केयर को 26.71 अंक दिये गये. इससे मेसर्स गजल का कुल अंक  87.20 हो गया और कैटरिंग केयर का 76.71. इस तरह आयोजन समिति ने  381.84 रुपये के बदले 781 रुपये प्रति खिलाड़ी खाना-नाश्ता उपलब्ध कराने का ठेका मेसर्स गजल कैटर्स को दे दिया.इवेंट मैनेजमेंट के मामले में 183.47 करोड़ का नुकसान इवेंट मैनेजमेंट के मामले में भी यही तरीका अपनाया गया. एल-वन को छोड़ विज क्राफ्ट को दे दिया गया. इससे 183.47 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. समिति ने बिना बैंक गारंटी के ही 173.03 करोड़ रुपये का मोबलाइजेशन एडवांस भी दे दिया. इस राशि की वसूली अब कैटरर से नहीं की जा सकती. समिति ने एडवांस देने के मामले को मंत्री की ओर से विशेषाधिकार के तहत लिया गया फ़ैसला बताया है. समिति के इस जवाब को अमान्य करार देते हुए पीएजी ने यह टिप्पणी की है कि किसी मंत्री या अधिकारी को जनता का पैसा अपनी मर्जी के तहत खर्च करने का अधिकार नहीं है.ठेकेदार को 268.20 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाया खेल में वोलेंटियर्स की जरूरतों से संबंधित टेंडर के निबटारे में भी एल-वन को काम नहीं दिया गया. इससे 45.35 लाख रुपये का नुकसान हुआ. ‘साइनेज जाब’ के मामले में भी एनजीओसी ने ठेकेदार को 268.20 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाया. समिति ने सिंगल टेंडर के  बावजूद सरकार द्वारा निर्धारित दर से ज्यादा पर भाड़े की गाड़ियां लेने का फ़ैसला किया. इससे सरकार को 347.33 लाख रुपये का नुकसान हुआ. कार्यक्रमों की संख्या घटायी रिपोर्ट में कहा गया है  समिति ने 33 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए टेंडर निकाला और निबटारा किया. पर, बाद में कार्यक्रमों की संख्या घटा कर छह कर दी. हालांकि लागत में किसी तरह की कटौती नहीं की. ऐसा कर समिति ने एक निजी संस्था को लाभ पहुंचाया. समिति ने सरकार और केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशों का उल्लंघन कर अग्रिम दिया. इससे इंट्ररेस्ट के प में उसे 108.42 लाख का नुकसान हुआ.128.07 लाख की लागत पर ‘ वीआइपी लाउंज’ को सुसज्जित करने का काम नॉमिनेशन के आधार पर दे कर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. टिकट और वीआइपी चेयर मद में विभिन्न संस्थाओं को दिये गये 183.36 लाख रुपये का समायोजन नहीं किया गया. |