महाश्वेता देवी को अपना आदर्श माननेवाली इस युवा साहित्यकार ने खुद को बहुत कम समय में साबित किया है. वर्ष 2001 में कथादेश में इनकी पहली कहानी मोइनी की मौत प्रकाशित हुई. फिर नया ज्ञानोदय, वागर्थ, हंस, कथादेश जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित होती रही. 2008 में इन्हें उपन्यास मैं बोरिशइल्ला के लिए लंदन हाउस ऑफ लॉर्डस की ओर से अंतरराष्ट्रीय कथा सम्मान मिला. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास को राजकमल प्रकाशन के गत सात वर्षो में प्रकाशित 30 बेहतरीन उपन्यासों में एक माना गया. इस बेस्टसेलर का अंग्रेजी अनुवाद रूपा एंड कंपनी नयी दिल्ली की ओर से किया गया. महिला सशक्तीकरण के नाम पर किसी खास दिन रैली, धरना या प्रदर्शन से ये इत्तेफाक नहीं रखती. इनका कहना है, किसी चीज को मांगने की अपेक्षा खुद को अपने कार्यो से साबित करना ज्यादा बेहतर है. अपने आप को लायक बनाओ, तभी सफलता और उपलब्धियां आपके पास आती है. |