मुंबई : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के अध्यक्ष शशांक मनोहर की कड़ी आपत्तियों के कारण रविवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) क्रिकेट टूर्नामेंट में नयी टीमों को शामिल करने की निविदा प्रक्रिया टालनी पड़ी. बताया जाता है कि निविदा के कुछ विवादास्पद उपबंधों पर मनोहर ने आपत्ति जतायी थी. उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि तमाम सफ़लताओं के बावजूद आइपीएल बीसीसीआइ का एक हिस्सा भर है तथा बीसीसीआइ अध्यक्ष इसके प्रभारी हैं. गौरतलब है कि आइपीएल की नयी निविदाओं को बोर्ड अध्यक्ष से पूर्वानुमति जरूरी होती है. आइपीएल संचालक मंडल के उपाध्यक्ष निरंजन शाह के अनुसार बीसीसीआइ अध्यक्ष ने निविदा की कुछ शताब को अनुपयुक्त मानते हुए इनमें संशोधन की मांग की थी. इसी कारण निविदा प्रक्रिया 21 मार्च तक टालनी पड़ी. शाह का कहना है कि देश की हरेक क्रिकेट गतिविधि के मामले में अंतिम अधिकार बीसीसीआइ का है. आइपीएल भी उसके अधीन ही शुरू किया गया है. इसलिए किसी भी नयी प्रक्रिया के पहले बोर्ड अध्यक्ष की अनुमति चाहिए होती है. सूत्रों के अनुसार मनोहर चाहते थे कि निविदा में और पक्षों को शामिल किया जाए तथा इसके विवादास्पद उपबंधों को रद्द कर दिया जाए. इस कारण निविदाओं को खोले बिना ही आवेदकों को वापस दे दिया गया. उधर प्रक्रिया टलने के कारण निविदाकार दुखी नजर आ रहे हैं. कुछ निविदाकारों का कहना है कि आइपीएल यदि उनकी कोटेशन पर विचार नहीं करना चाहता है तो दोबारा निविदा मंगाने की बजाए पूरी प्रक्रिया ही रद्द की जानी चाहिए. |