| रांची : किसी के पास कुछ नहीं है तो हंसती है दुनिया, किसी के पास सब कुछ है तो जलती है दुनिया, जोगी रे क्या जादू है तेरे प्यार में..ङ्क भजन गाते-गाते संत आसाराम बापू अपने भक्तों के बीच से ओझल हो गये. वक्त था दिन के 1.18 बजे. जैसे ही वह व्यास पीठ से उतरे, उनके पीछे दौड़ पड़ा भक्तों का रेला. कोई माटी चूम रहा था तो कोई दूर से ही अपने गुरुवर को प्रणाम कर रहा था. दृश्य तो एकदम भाव-विह्वल. यानी शहर में एक ऐसा जोगी आया, जो लोगों में प्रेम, भक्ति व आजीवन आरोग्य रहने का गुरुमंत्र दे दिया. हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़. यह दर्शाती है कि आज भी लोग बापू के उतने ही दिवाने हैं. जबकि उनकी संस्था पर कई आरोप लग चुकी है. सैकड़ों लोगों ने गुरु दीक्षा ली. राजधानी का मोरहाबादी मैदान खचाखच भरा था. बापू सत्संग स्थल से सीधे एयरपोर्ट पहुंचे, वहां से जमशेदपुर के लिए रवाना हो गये. करीब 20-25 मिनट के लिए संत श्री व्यासपीठ पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सत्संग की महिमा बतायी. उन्होंने राजा जनक, भगवान अज सहित अन्य महान आत्माओं की संज्ञा देते हुए कहा कि बिना गुरु व सत्संग के जीवन सफल नहीं हो सकता है. संसार के वैसे लोग चाहे वह कितने भी बुद्धिमान हो, लेकिन भगवान में आसक्ति नहीं हो तो जीवन व्यर्थ है. सत्संग में आने-जाने व देखने से भी जीवन का भला होता है. इससे पूर्व स्वामी सुरेशानंद जी ने कहा कि शरीर और संसार दिखता है पर रहता नहीं है. उसी तरह ईश्वर दिखता नहीं पर रहता है. सत्संग स्थल पर भंडारा में काफी संख्या में लोगों ने भोजन ग्रहण किया. |