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अमेरिका-रूस संबंधों के नये आयाम
एंड्रइ पोइनकोसवी | 6/24/2009 7:40:14 PM

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जर्मनी के पूर्व चांसलर गेरहार्ड श्रोडर का रूस में काफ़ी सम्मान है. सम्मान का कारण यह है कि उन्होंने रूस की गैस कंपनी गाजप्रोम के हित में दो मिलियन यूरो से ज्यादा के व्यवसाय का फ़ायदा कराया है. वे रसियन साइंस एकेडमी के साथ जुड़े रहे हैं, साथ ही वह रूस के व्यावसायिक घरानों के नामचीन व्यक्ित जेनोसी ब्लादिमीर के साथ अपनी प्रगाढ़ दोस्ती पर एक पुस्तक भी लिख चुके हैं. जर्मनी और रूस दोनों मिलकर नॉर्ड स्ट्रीम गैसपाइप लाइन का निर्माण शुरू करने जा रहे हैं. यह परियोजना काफ़ी महंगी है, जो दोनों देशों के हित के साथ-साथ दो तरह के सामरिक उद्देश्यों को पूरा करेगी. यह सामरिक उद्देश्य बेलारूस और यूक्रेन के हितों के खिलाफ़ होगा, साथ ही गैस पाइपलाइन की यह   परियोजना इन दोनों देशों को ऊर्जा निर्भरता में रूस के अधीन बनाये रखना चाहती है. इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि बेलारूस और यूक्रेन की राजधानी मिंस्क और किव में किसकी सत्ता है. यह परियोजना रूस की अर्थव्यस्था को जर्मनी के समकक्ष लाने में मदद करेगी जो शुरू से जर्मनी को प्राकृतिक संसाधन सप्लाई करता आया है. श्रोडर के पूर्ववर्ती चांसलर भी रूस के साथ इस तरह के संबंधों की वकालत करते आये हैं. ओबामा प्रशासन के दौर में रूस-अमेरिका के संबंध अच्छे हुए हैं.        

 

हालांकि यह संबंध अगर प्रगाढ़ हुआ है, तो इसका कारण यह नहीं है कि इसमें दोनों देशों के प्रशासकीय लोगों का बहुत ज्यादा योगदान है, बल्कि इन संबंधों पर वैसे लोगों का प्रभाव रहा है जिनका उठना-बैठना रूस और क्रेमलिन के व्यावसायिक हस्तियों के बीच रहा है. इन नामों में हेनरी किसींजर, जेम्स बेकर, थॉमस ग्राहम और दमित्री साइम जैसे लोगों के नाम प्रमुख हैं. किसींजर और बेकर का नाम वैश्विक भौगोलिक राजनेताओं के रूप में लिया जाता है, जबकि ग्राहम और साइम रूस के सम्मानित विशेषज्ञों में गिने जाते हैं. ये चारों लोग दोनों देशों के प्रशासन से संबंधित रिपोर्ट लिखते हैं और मास्को तथा वाशिंगटन के बीच अक्सर दौरा लगाते रहते हैं. ओबामा प्रशासन का रूस के साथ दो-तरफ़ा संबंध कैसे सुचारू बना रहे, इसके लिए सदैव तत्पर रहते हैं.       

 

श्रोडर की तरह ये चारों लोग अर्थव्यस्था में रूचि रखने वाले हैं. बेकर मौजूदा समय में रूसी अर्थव्यस्था को संभालने वाली दो प्रमुख कंपनियां, गाजप्रोम और रॉजनेफ़्ट, के कंसल्टेंट हैं. किसींजर-प्रिमाकोव के नाम से काम करने वाला एक समूह, निजी क्षेत्र का एक प्रयास है, जिसे रूस के राष्ट्रपति पुतिन का वरदहस्त प्राप्त है. इस समूह की देखरेख बेकर करते हैं, जिसका प्रमुख काम रूस और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत बनाना है. ऐसे लोग अगर रूस और अमेरिका के दोस्ताना संबंधों की वकालत करते हैं, तो माजरा समझने लायक है. इसको देखते हुए  ग्राहम की आयी एक ताजा रिपोर्ट- रिसरजेंट रसिया एंड यूएस परपस, दोनों देशों के संबंधों के बारे में काफ़ी कुछ कहती हैं. लेखक ने इस रिपोर्ट में इस बात को खुल कर पेश किया है कि कैसे आज रूस अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है. देश में पनपी चुनौतियों को सहर्ष स्वीकार कर उसने जूझने का पूरा प्रयास किया है. ऐसे प्रयास उसे फ़िर से दुनिया के पुराने सशक्त संघ में वापस लायेगी. आगे इसी रिपोर्ट में ग्राहम ने बताया है कि रूस को आनेवाले दशक में अपने को विकसित और आधुनिक राष्ट्र बनाने के लिए लगभग एक खरब डॉलर धन निवेश करना होगा. यह धन देश की आधारभूत संरचना को सुधारने पर खर्च होगा. अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश अपना हित रूस के विकास में देखते हैं. रूस में तकनीकी विकास के लिए निवेश का एक बड़ा हिस्सा यूरोप और अमेरिका से आयेगा, ऐसा कहना है ग्राहम के उस रिपोर्ट का. तकनीकी और निवेश के अलावा रूस को अपने विदेश नीति पर पूरा ध्यान देना होगा. इस संदर्भ में ग्राहम ने ओबामा प्रशासन को सलाह दिया है कि उसे यूक्रेन की तुलना में क्रेमलिन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. ग्राहम ने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि जबतक अमेरिका रूस के साथ तुष्टिकरण की नीति नहीं अपनाता, तब तक रूस पूरी दुनिया में अमेरिका का विरोध जब चाहे तब करता रहेगा. पहले कमजोर दिखने वाला रूस आज अपने अकूत संसाधनों और छिटपुट जनसंख्या के बल पर दुनिया के महारथी देश चीन और अमेरिका के बीच गंभीर प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहा है. रूस के प्रधानमंत्री पुतिन ने दावोस में विश्व ओर्थक मंच की बैठक के दौरान विश्व को चुपके से चुनौती दी कि दुनिया उसे विकास करने में मदद करे अन्यथा वह चीन को आगे बढ़ने में मदद करेगा. इस चुनौती को देखते हुए रूस की जरूरतों का ख्याल रखना होगा.         ग्राहम ने पश्चिमी देशों द्वारा रूस को दिये गये कर्जो को माफ़ करने की सलाह दी है, लेकिन वे पुतिन के कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाते हैं. उनके अनुसार पश्चिमी देशों द्वारा दिया गया धन पुतिन के शासन में बहुत ज्यादा सुधार नहीं ला पायेगा. इसके पहले भी सहायता धनों का एक बड़ा हिस्सा तेल संपत्तियों को बनाने पर तबाह हो चुका है. ग्राहम ने सीधे और साफ़ शब्दों में कहा है कि पुतिन का शासन राजनीतिक, संस्थागत और प्रबुद्ध स्तर पर आधुनिकीकरण के योग्य नहीं है.

 

(लेखक वॉशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट में विजिटिंग फ़ेलो तथा रूस के जानेमाने राजनीतिक विज्ञानी हैं.)

 

कॉपीराइट  प्रोजेक्ट सिंडिकेट, 2009

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