जमशेदपुर : जनगणना-2011 के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले महज 940.27 महिलाएं हैं. लिंग अनुपात में फर्क से परेशान केंद्र सरकार ने आनन-फानन में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों पर प्रतिबंध लगा दी.
इधर पूर्वी सिंहभूम में सिविल सर्जन कार्यालय के अनुसार शहर में चार पंजीकृत पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें प्रयोग में लायी जी रही है.जबकि पूरे शहर में कुकुरमुत्ते की तरह अल्ट्रासाउंड मशीनों के केंद्र का जाल बिछा है.मशीनों का सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए हाल में जिला परामर्श समिति को साप्ताहिक जांच रिपोर्ट देने का सख्त निर्देश स्वास्थ्य विभाग से जारी हुआ है.
वहीं सिविल सर्जन का कहना है कि अब तक उनके पास साप्ताहिक रिपोर्ट नहीं आयी है. जांच के अभाव में स्पष्ट नहीं है कि मशीनों का प्रयोग पीसीएंडपीएनडीटी एक्ट-1994 के नियमावली व प्रावधानों के तहत हो रहा है या नहीं? सिविल सर्जन कार्यालय में पंजीकृत मशीनों की संख्या 140 है जिसमें 32 खराब हैं यानी कुल 108 मशीनें प्रयोग में लायी जा रही है.
क्या कहते हैं नर्सिग होम
निजी नर्सिग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ सौरभ चौधरी ने दावा किया कि चिकित्सकों की जानकारी में इसका दुरुपयोग नहीं होता है. चिकित्सक डॉ रेणुका चौधरी ने बताया कि लिंग परीक्षण के लिए निवेदन तो आते ही हैं जिसे हम इनकार कर देते हैं.
पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें प्रतिबंधित किये जाने की जानकारी नहीं है. नियमित जांच के लिए आदेश विभाग से जारी हुआ है. अब तक रिपोर्ट नहीं आयी है.-डॉ विभा शरण, सिविल सर्जन
: मुकेश कुमार सिन्हा
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