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डॉक्टरों से मारपीट की नौबत क्यों?

Updated at : 22 Jul 2014 6:34 AM (IST)
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डॉक्टरों से मारपीट की नौबत क्यों?

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में शनिवार को एक बार फिर जूनियर डॉक्टरों और एक मरीज के परिजनों के बीच मारपीट हुई, जिसके बाद तीन घंटे तक इमरजेंसी सेवा ठप रही. रविवार को भी चिकित्सा सेवा बाधित रही. झारखंड का एक बड़ा हिस्सा गंभीर स्थिति में इलाज के लिए रिम्स पर निर्भर है. ऐसे […]

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राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में शनिवार को एक बार फिर जूनियर डॉक्टरों और एक मरीज के परिजनों के बीच मारपीट हुई, जिसके बाद तीन घंटे तक इमरजेंसी सेवा ठप रही. रविवार को भी चिकित्सा सेवा बाधित रही. झारखंड का एक बड़ा हिस्सा गंभीर स्थिति में इलाज के लिए रिम्स पर निर्भर है.

ऐसे में रिम्स में चिकित्सा सेवा ठप होने या हड़ताल का क्या दुष्प्रभाव होता होगा, यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं है. यहां यह सवाल स्वाभाविक है कि रिम्स या अन्य चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों से मारपीट की नौबत बार-बार क्यों आती है? दरअसल, यह एक जटिल मसला है जिसके कई पहलू हैं. राज्य में गांवों और पंचायतों के स्तर पर अस्पतालों का इंतजाम न के बराबर है. प्रखंड स्तरीय अस्पतालों की हालत भी खराब है. ऐसे में सारा बोझ जिला के सदर अस्पतालों और राजधानी व अन्य प्रमुख शहरों में स्थित मेडिकल कॉलेजों पर पड़ता है. इनके पास भी मरीजों की भीड़ के मुताबिक डॉक्टरों, सहायक चिकित्सा कर्मचारियों, उपकरणों व अन्य संसाधनों की कमी है. इसकी वजह से मरीजों को तेज और समुचित इलाज नहीं मिल पाता है.

नतीजतन, कई बार मरीजों की मौत हो जाती है या उनकी हालत बिगड़ जाती है जिससे उनके परिजनों में गुस्सा फूट पड़ता है. दूसरा अहम पहलू यह है कि डॉक्टरी का परोपकारी पेशा अब खालिस धंधे में बदल गया है. डॉक्टर दवा से लेकर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी की जांच तक में कमीशन वसूलते हैं. कई बार तो जरूरत न होने पर भी पैसा बनाने के लिए तरह-तरह की जांच लिख देते हैं. निजी अस्पताल व नर्सिग होम बढ़ा-चढ़ा कर बिल बनाने के लिए कुख्यात हैं.

ऐसी स्थिति में कई बार मरीज के परिजनों का धीरज चुक जाता है और लड़ाई-झगड़े की स्थिति पैदा हो जाती है. डॉक्टरों के साथ मारपीट न हो, इसके लिए भारतीय चिकित्सा संघ मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहा है. इसके लिए विधेयक तैयार भी हो चुका है. इसमें डॉक्टरों से मारपीट या चिकित्सा संस्थानों को नुकसान पहुंचाने पर सख्त सजा का प्रावधान है. लेकिन, शायद यह उचित हल नहीं है. स्थितियां ऐसी बनाने की जरूरत है कि जनता के मन में खुद ही डॉक्टरों के प्रति सम्मान पैदा हो.

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