देवघर : माफ़िया देवघर की नदियों का बालू लूट रहे हैं. बालू बिहार के विभिन्न जिले और बंगाल को भेजा जा रहा है.अन्यत्र भेजने में बालू माफ़िया ट्रैक्टर या ट्रक ही नहीं, बल्कि रेलवे की मालगाड़ी का भी उपयोग कर रहे हैं.
जिला प्रशासन की नाक के नीचे मथुरापुर स्टेशन के नजदीक बालू का अवैध कारनामा चल रहा है. हालांकि देवघर खनन विभाग को इस खेल की पूरी जानकारी है. जिला खनन पदाधिकारी ने आसनसोल रेलवे के डीआरएम, झारखंड खनन विभाग के सचिव व अपने विभाग के अन्य वरीय अधिकारियों को पत्र भेज कर जानकारी दी है.
आश्चर्य की बात तो यह है कि खनन पदाधिकारी ने देवघर जिला प्रशासन को ही इस आशय की सूचना नहीं दी है.बालू की इस तस्करी के कारण सरकार को लाखों के राजस्व का चूना रोजाना लग रहा है.रॉयल्टी भी नहीं मिल रही है. इसके अलावा नदियों से बालू का लगातार उठाव के कारण जल स्तर भी काफ़ी नीचे जा रहा है. इस कारण नदियों में भी जल संकट दिख रहा है.
तस्करों का है स्ट्रांग नेटवर्क
इस तस्करी में झारखंड, बिहार और बंगाल का स्ट्रांग रैकेट काम कर रहा है.रेलवे के अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा बालू के अवैध कारोबारी और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से इस कारनामे को अंजाम दिया जा रहा है.मथुरापुर स्टेशन के पास अवैध बालू रैक प्वाइंट बना है, जहां रेलवे की बॉगियां खड़ी कर दी जाती हैं. इन बॉगियों में जेसीबी पे-लोडर से बालू लदाई धड़ल्ले से होती है.एक ओर नदियों से ट्रैक्टर द्वारा बालू लाकर रेलवे के अघोषित रैक प्वाइंट पर जमा किया जाता है, तो दूसरी ओर रैक प्वाइंट से बालू को रेलवे बॉगी में लोड कर सहरसा, दरभंगा व अन्य जिले के लिए भेजा जाता है.
बालू के अवैध कारोबार में बालू तस्करों की रेल कर्मचारियों की मिलीभगत है. खनन विभाग इसकी रोकथाम के लिए पूर्व रेलवे के डीआरएम सहित कई आलाधिकारियों को लिख चुका है. साथ ही झारखंड के खनन विभाग के सचिव को भी इसकी जानकारी है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है.कैलाश रजक, जिला खनन पदाधिकारी, देवघर
अवैध बालू उठाव में जिस किसी की मिलीभगत है, उस पर सख्त कार्रवाई हंोनी चाहिए. वे इस मामले को विधानसभा में उठायेंगे. फ़िर भी अंकुश नहीं लगा, तो आंदोलन छेड़ा जायेगा. जरूरत पड़ी तो कार्य स्थगन प्रस्ताव लायेंगे-सुरेश पासवान, विधायक, देवघर विधानसभा
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