कारोबार की दुनिया में पहला कदम

इसके बाद आपको विचार करना चाहिए कि आपके बिजनेस आइडिया के लिए कारोबार का ढांचा क्या हो. क्या वह प्रोप्राइटरी प्रतिष्ठान हो, साझेदारी फर्म हो, कंपनी हो या फिर सीमित दायित्व वाली साझेदारी हो? कौन सा ढांचा बेहतर होगा यह आपके बिजनेस के आकार-प्रकार पर निर्भर है.

आप व्यवसाय करना चाहते हैं. आपके पास अच्छा बिजनेस आइडिया है और आपको पूरा यकीन है कि यह पैसों की आमद की दृष्टि से भी सफल होगा. किसी व्यवसाय को शुरू करने के लिए ये चीजें निश्चित रूप से जरूरी हैं. लेकिन इनके अलावा भी एक चीज पर विचार करना जरूरी है कि आपके उद्यम (वेंचर) का ढांचा क्या होगा.

अगर आप अपने चारों ओर नजर डालेंगे तो पायेंगे कि सभी प्रतिष्ठानों के नाम में ‘लिमिटेड’ या ‘प्राइवेट लिमिटेड की पूंछ नहीं लगी होती. ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने घर से ही कुछ काम करके पैसा कमा रहे हैं. या फिर बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपने दोस्तों अथवा परिवार के सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से निवेश करके मुनाफे में साझा कर रहे हैं.

आप जब इन विकल्पों पर विचार करें तो इस बात का भी ख्याल रखें कि आप जो विकल्प चुन रहे हैं, उसके साथ किस तरह की कानूनी और लेखा (एकाउंटिंग) जरूरतें जुड़ी हुई हैं. आपके उद्यम के ढांचे के कुछ विकल्प क्या हो सकते हैं, हम आपको यहां बता रहे हैं.

स्वामित्ववाला संगठन

ट्यूशन सेंटर खोलना, लोंगों को ठहरने और नाश्ते की सेवा प्रदान करना, टिफिन सेवा, इवेंट प्लानिंग, दरबान सेवा जैसे अनेक कारोबार हैं, जिन्हें बहुत कम पूंजी के साथ शुरू किया जा सकता है. आप चाहें तो इन्हें अपने घर से चला कर कॉमर्शियल प्रॉपर्टी का किराया भी बचा सकते हैं. ऐसे मामलों में जहां उद्यम पूरी तरह आपकी काबिलियत पर निर्भर करनेवाला हो, सीमित स्तर पर हो और ग्राहकों का दायरा छोटा हो, वहां संगठन का रूप स्वामित्व (प्रोप्राइटेरी) वाला होना सबसे बेहतर होता है.

यहां कानूनी जरूरतें बहुत कम होती हैं. साधारण सा बही- खाता काफी होता है, जिसे बनाना और रखरखाव करना आसान होता है. हालांकि इसमें एक खामी है. अगर धंधे में नुकसान होता (चाहे वह निवेशित पूंजी से भी ज्यादा हो) है तो इसे पूरी तरह आपको ही वहन करना होगा. क्योंकि व्यवसाय की अपनी कोई पहचान नहीं होती और सारा उत्तरदायित्व आपका ही माना जाता है. इसके अलावा कारोबार के इस रूप की कुछ सीमाएं हैं, जैसे सीमित पूंजी, सीमित जीवन काल और सीमित प्रबंधन क्षमता.

साझेदारी फर्म

स्वामित्व वाले कारोबार में ऊपर जिन सीमाओं का जिक्र किया गया है, उनका अर्थ तभी है, जब आप अपना व्यवसाय बढ़ाने की सोच रखते हों. इसके अलावा, लेखा और कानूनी फर्म जैसे कई व्यावसायिक संगठन हैं, जिनके लिए कुशल लोगों का एकत्रीकरण ( पूलिंग ) जरूरी होता है. इसी तरह टिकाऊ उपभोक्ता सामानों ( कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ) और गाड़ियों की डीलरशिप या फिर लघु उद्योग के लिए पूंजी के एकत्रीकरण की जरूरत पड़ सकती है.

अगर आपको लगता है कि आप और आपके दोस्त यह सब जमा कर सकते हैं, तो आप लोग एक साझेदारी ( पार्टनरशिप ) फर्म बना सकते हैं. इस स्थिति में एक पार्टनरशिप डीड तैयार की जानी जरूरी है. इसमें साझेदारों के पारस्परिक अधिकारों, शक्तियों और दायित्व का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए.

जानकारों की सलाह है कि आपको फर्म का पंजीयन भी करा लेना चाहिए, क्योंकि अगर कभी साझेदारों के बीच या फिर तीसरे पक्ष के साथ कोई कानूनी विवाद होता है तो कानून अपंजीकृत फर्मो के खिलाफ जाता है. साथ ही, आपकी फर्म का कर के लिहाज से अलग अस्तित्व माना जायेगा, जबकि प्रोप्राइटेरी रूपवाले संगठन में आपकी व्यक्तिगत आय और कारोबार की आय को एक में जोड़ कर देखा जाता है. हालांकि साझेदारी फर्म में भी यह खामी मौजूद है कि पूरा का पूरा दायित्व (लायबिलिटी) साझेदारों पर ही
होता है.

कंपनी प्रारूप

इससे पूर्व के दो रूपों में जो कमजोरियां हैं, उससे पार पाने का तरीका है कंपनी. कंपनी का कानून के तहत अपना अस्तित्व होता है और इसके सदस्यों पर कंपनी के करारों और कर्जो के लिए व्यक्तिगत रूप से कानूनी उत्तरदायित्व नहीं होता. कंपनी बनाने के लिए दस्तावेजों में सबसे प्रमुख होता है, मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन ( एमओए ) जिसे कंपनियों के रजिस्ट्रार के यहां दाखिल करना होता है. एमओए कंपनी के अधिकारों को परिभाषित करता है, उसके कामकाज के क्षेत्र को निर्धारित करता है और बाहरी दुनिया के साथ उसके रिश्तों का भी विनियमन ( रेगुलेशन ) करता है.

ऐसे कारोबार जिनके लिए अपेक्षाकृत बड़ा पूंजी निवेश चाहिए, उनके लिए यह आदर्श ढांचा है. हालांकि, कंपनी बनाने के लिए काफी कागजी काम करने की जरूरत पड़ती है. एमओए के बाद दूसरा प्रमुख दस्तावेज होता है आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन ( एओए ), जो आंतरिक प्रबंधन के लिए नियमों का परिभाषित करता है.

निश्चित रूप से यह प्रक्रिया को आपको दुरूह महसूस हो रही होगी. लेकिन अच्छी बात यह है कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रलय तकनीक के मामले में उन्नत हो गया है. मंत्रलय की एमसीएम-21 सेवा के तहत आप ज्यादातर कानूनी जरूरतों को बस माउस क्लिक करके पूरी कर सकते हैं.

This Article Posted on: April 16th, 2012

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