रायपुर : छत्तीसगढ के सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन की रिहाई में समय सीमा बढाने में असमर्थता जताते हुए माओवादियों ने कहा है सरकार उनकी मांगों पर अपना रवैया स्पष्ट करे तब वह जवाब देंगे.
माओवादियों ने संवादाताओं को भेजे ई मेल संदेश में कहा है कि छत्तीसगढ शासन की ओर से समय सीमा बढाने के अनुरोध के बारे में उन्हें मीडिया से जानकारी मिली है. इस पर वे ऐन वक्त पर निर्णय लेने में असमर्थ है. क्योंकि उनकी मांगों पर शासन की ओर से कोई जवाब मिलने पर ही वह समय सीमा बढाने के बारे में निर्णय लेंगे.
माओवादियों ने कहा, ''छत्तीसगढ शासन हमारी मांगों पर अपना रवैया स्पष्ट करे, उसके बाद ही हम समय सीमा बढाने के बारे में अपने मध्यस्थतों के माध्यम से जवाब भेज सकते है.''
उन्होंने कहा है कि शासन की ओर से हर विषय पर टालमटोल करने के रवैये की हम निंदा करते हैं. एक युवा, दलित एवं गरीब कहे जाने वाले जिलाधीश के भविष्य को लेकर राज्य शासन कितना गंभीर है यह उनका टालमटोल का रवैया दर्शाता है.
ईमेल में कहा गया कि शासन के रवैये की निंदा करते हुए जनता एवं नागरिक समाज आगे आएं.
वहीं एक अन्य ई मेल संदेश में माओवादियों ने कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन को बंधक बनाए जाने के कारणों के बारे में जानकारी दी है. माओवादियों ने आरोप लगाया है कि एलेक्स पाल मेनन के जिलाधीश के पद पर रहते सुकमा जिले की पुलिस ने एक युवक की हत्या कर दी तथा उसे बाद में आत्महत्या बता दिया गया. वहीं पुलिस ने इस जिले में और भी कई तरह के अत्याचार किए हैं.
इस विज्ञप्ति में उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार करने, जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी रखने और ग्रामीणों को फर्जी मामलों में फंसाने का आरोप लगाया है.
माओवादियों ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मनीष कुंजम ने उनकी ओर से मध्यस्थता करने से इंकार कर दिया था लेकिन उन्होंने कलेक्टर के स्वास्थ्य को देखते हुए मानवता के नाते कुंजम से दवाई स्वीकार कर ली.
छत्तीसगढ के सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का बीते शनिवार माओवादियों ने अपहरण कर लिया था तथा उनके दो सुरक्षा गार्डों की हत्या कर दी थी. मेनन की रिहाई के लिए राज्य सरकार और माओवादियों की ओर से तय किए गए मध्यस्थों ने बातचीत शुरु कर दी है और इसी दौरान राज्य सरकार ने माओवादियों से समय सीमा में बढोतरी करने की मांग की थी.
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