देवघर : शहर का विकास, व्यवस्था के साथ-साथ साफ-सफाई की जिम्मेवारी निगम की है. साफ-सफाई होती भी है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि साफ-सफाई रखने वाला निगम ही शहर के अन्य मुहल्लों को कचरा कर रहा है.
सुबह होते ही शहर के विभिन्न मुहल्लों में सफाईकर्मी पहुंचते हैं. नालियों से कचरा का उठाव भी करते हैं, लेकिन जगह के अभाव में कचरे को नाले के बगल में ही छोड़ देते हैं. फिर निगमकर्मी रात होने का इंतजार करते हैं. रात होते ही कर्मचारी इन कचरों को ट्रैक्टर से उठाव कर दूर के दूसरे मुहल्लों में फेंक आते हैं, जिससे वह क्षेत्र भी कचरामय हो जाता है.
दूसरे मुहल्लों में फेंक आते हैं कचरा
नगर निगम को साफ-सफाई की जिम्मेवारी तो है, पर उसके पास कचरा फेंकने के लिए समुचित स्थान या उसे डिस्ट्राय करने की मशीन नहीं है. इसके कारण दूर के मुहल्ले में कर्मी कचरा फेंककर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं.
कई जगह हो चुका है विरोध
एक दर्जन जगहों पर कचरा फेंकने को लेकर विरोध हो चुका है. हाथी पहाड़, देवघर श्मशान, डढ़वा नदी, कुंडा, रोहिणी, रामपुर, भुरभुरा मोड़, बैद्यनाथपुर, महेशमारा, गिधनी, गुरुकुल सातर में पहले कचरा फेंका जाता था, जहां मुहल्लेवासियों द्वारा विरोध करने पर बंद किया गया.
जमीन नहीं होने से निगम को आर्थिक क्षति
कचरा फेंकने की जमीन शहरी क्षेत्र में नहीं होने से उसे दूर जाना पड़ता है. इस कारण ज्याद डीजल खर्च होता है और निगम को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ती है. इसके साथ ही समय की भी बरबादी होती है.
कचरा फेंकना निगम के लिए समस्या बनता जा रहा है. प्रतिदिन चालीस-ट्रैक्टर कचरा का उठाव होता है, लेकिन निगम के पास उतनी जमीन नहीं है, जहां फेंका जा सके. निगम में शामिल सभी 44 गांवों का कागज अभी तक नहीं मिला है. जमीन मिलने से समस्या का कुछ निदान निकल सकता है. प्रशासन से खाली जमीन मुहैया कराने की अपील की है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके. राजनारायण खवाड़े, मेयर, नगर निगम
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