सबसे खतरनाक पल थे वो 70 मिनट

* हादसे की दास्तां पायलट वीके सिंह की जुबानी
* गिरने के बाद रनवे पर घिसटता रहा हेलीकॉप्टर
* एक पायलट का धर्म होता है हर कीमत पर पैसेंजर की रक्षा करना

रांची : वो 70 मिनट मेरी जिंदगी के सबसे खतरनाक पल थे. मेरे ऊपर जिम्मेवारी थी कि मेरे साथ बैठे लोगों को कुछ न हो. खतरा है यह बात सिर्फ मुख्यमंत्री अजरुन मुंडा जानते थे. बाकी तीन अन्य पैसेंजर इस खतरे से अनजान थे.

उनकी जिम्मेवारी मेरे ऊपर थी. बस यही जिम्मेवारी ने मुङो हार्ड लैंडिंग के लिए प्रेरित किया. हां, एटीसी को इस बात की जानकारी दी. उन्हें पहले सिक्यूरिटी मेजर्स तैयार रखने के लिए कहा गया था.

यह बात कहते ही अगस्टा हेलीकॉप्टर के चीफ पायलट कैप्टन वीके सिंह की आंखें बंद हो जाती हैं. आइसीयू में बेड पर वह शांत हो जाते हैं. बगल में उनके पिता रणवीर सिंह व पत्नी शिखा सिंह बैठे हुए हैं. ठीक बायीं ओर की बेड पर को पायलट कैप्टन जीपीएस कौशिक लेटे हुए थे.

बुधवार को कुचाई में लैंडिग में विफल होने के बाद ठीक दिन के 11.50 बजे पायलट श्री सिंह ने एटीसी रांची को सूचित किया था कि हेलीकॉप्टर का टेल रडार खराब गया है. लैंडिंग नहीं हो सकती. उसकी योजना है रांची आकर लैंडिग कराने की.

तब मुख्यमंत्री अजरुन मुंडा ही इस बात को जान रहे थे. वह हेडफोन से पायलट की बात सुन रहे थे. उनकी पत्नी मीरा मुंडा ठीक उनके बगल में बैठी हुई थी. सामनेवाली सीट पर विधायक बड़कुंवर गगराई व एसपी मनोज सिंह बैठे हुए थे. पर, ये तीनों आने वाले उस खतरे से अनजान थे कि हार्ड लैंडिंग में जान भी जा सकती है.

वीके सिंह प्रभात खबर से बात करते हुए आत्मविश्वास से लबरेज नजर आते हैं. उनकी आंखों में खौफ का वह पल अब भी आता-जाता है. बताते हैं, मुख्यमंत्री कोऑपरेटिव हैं. उन्होंने कहा कि जो आपको उचित लगता है वही करें.

फिर क्या हुआ वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. दुनिया में यह रिकार्ड है कि हार्ड लैंडिंग के बाद सारे लोग जीवित हैं. यह गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज होनेवाली बात है.

वीके सिंह ने बताया : बुधवार को उड़ान के पहले हेलीकॉप्टर की सुरक्षा जांच की गयी थी. तब सब कुछ ठीक था. कहीं कोई गड़बड़ी नहीं थी. बैठने के पूर्व सीएम ने कहा कि एक और आदमी को बैठा लें क्या.

तब मैंने उन्हें सुरक्षा कारणों से मना किया. वह मान गये. उड़ान भरा. 30 मिनट की उड़ान के बाद ही कुचाई लैंडिंग के प्रयास के दौरान ही महसूस हुआ कि टेल रडार में खराबी आ गयी है. लैंडिंग नहीं हो सकती. उसी समय मैंने देखा कि कुचाई में लैंड यदि कराया गया, तो यहां सुरक्षा के अन्य उपाय नहीं हो सकते थे.

फिर मैंने स्वयं डिसाइड किया कि रांची में लैंडिंग करायी जायेगी. एटीसी को सूचना दी गयी. रांची लौटने के दौरान पता चला कि रडार पूरी तरह फेल चुका है. ऐसा शायद ही होता है कि रडार फेल हो जाता हो, पर यह हुआ.

अब हमें निर्णय लेना था कि क्या करना है. को-पायलट से बात हुई. थ्योरी में यह बात थी कि हार्ड लैंडिंग करायी जाती है, पर ऐसी स्थिति आयेगी यह कभी नहीं सोचा था, पर ईश्वर की कृपा है कि सब सुरक्षित हैं.

श्री सिंह बताते हैं कुचाई से लौटते समय मैंने एटीसी को सूचित कर दिया कि 15 मिनट में रन-वे खाली होना चाहिए. मैने रांची में अपने इंजीनियर को भी अलर्ट कर दिया. एटीसी ने यह कह कर असमर्थता जतायी कि 11.35 बजे जेट एयरवेज के उतरने का समय है, पूरा रन-वे खाली कर नहीं किया जा सकता, पर मैंने उन्हें जोर दिया और कहा कि यह इमरजेंसी है.

तब एयरपोर्ट अथॉरिटी के लोगों ने इस बात को समझा और जेट फ्लाइट को डायवर्ट कर दिया. फिर हम रांची एयरपोर्ट के ऊपर उड़ रहे थे. पांच-छह चक्कर लगाने के बाद जब लगा कि 15 मिनट का फ्यूल बचा है, तब हेलीकॉप्टर की स्पीड कम करना शुरू कर दिया. हम ग्राउंड को छूने की तैयारी में लग हुए थे.

इस दौरान सबको अलर्ट कर दिया गया. बैठे हुए सभी लोगों ने बेल्ट को टाइट कर लिया. सीएम शांत थे. इसके बाद करीब 10 फीट की ऊंचाई से हेलीकॉप्टर की हार्ड लैंडिंग करायी गयी. जमीन से टच होते ही यह कुछ दूर तक घिसटता चला गया. इसके बाद तो एयरपोर्ट सुरक्षा दस्ता के हवाले हम थे. ईश्वर का लाख-लाख शुक्र है कि सभी सलामत थे. एक पायलट का जो धर्म होता है, वह मैंने निभाया.

This Article Posted on: May 12th, 2012

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