मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर के मुसहरों का संगीत व गीत फ्रांस के कान फिल्म फेस्टिवल में गूंजेगा.16 से 27 मई तक चलनेवाले कान फिल्म फेस्टिवल में मुसहर समुदाय की लोक परंपरा गैंग्स ऑफ वासेपुर में दिखेगी.फिल्म को फेस्टिवल में नामांकित किया गया है.
देव डी के फिल्मकार अनुराग कश्यप की इस फिल्म में जिले के कटरा प्रखंड के सुंदरपुर टोले के महादलित बस्ती के लोक संगीत को शामिल किया गया है.महादलितों ने फिल्म में सामूहिक रूप से गीत व संगीत की प्रस्तुति दी है.फिल्म में कई जगह पर इसका इस्तेमाल बैकग्राउंड म्युजिक के रूप में हुआ है.टोले के योगेश्वर मांझी, फकीरा मांझी व बटोही मांझी सहित समुदाय की महिलाओं ने संगीत तैयार करने में मदद दी है.
-स्नेहा ने की थी रेकॉडिंग
2010 में फिल्म की संगीत निर्देशक स्नेहा खानवलकर अपनी टीम के साथ मुजफ्फरपुर आयी थीं. उन्होंने जिले के विभिन्न गांवों का भ्रमण किया था.इसमें स्पिक मैके के उत्तर बिहार प्रभारी यशवंत पाराशर ने उनकी मदद की थी.इसी दौरान स्नेहा बेरई गयी थीं. यहां महादलित परिवार से मिलवाने में साहित्यकार डॉ संजय पंकज ने उनकी मदद की थी.स्नेहा महादिलतों के संगीत से इतना प्रभावित हुईं कि उन्होंने कई दिनों तक इसकी रेकार्डिग की. स्नेहा दरभंगा गयी थीं.वहां भी उन्होंने लोक संगीत की रेकॉर्डिग की , लेकिन बेरई गांव के महादलित परिवार का लोक संगीत ही फिल्मकारों को रास आया और इसे फिल्म में शामिल किया गया.
फिल्म धनबाद के कोयला खदान में काम करनेवाले एक परिवार की सच्ची कहानी है. खदान में काम करने वाले मजदूरों की भाषा व संस्कृति बिहार की थी, इसलिए यहां की लोक संस्कृति को शामिल करना जरूरी था.- स्नेहा खानवलकर, संगीत निर्देशक
स्नेहा से पहले मेरा कोई संपर्क नहीं था.उन्हें एक संगीतकार ने मेरा मोबाइल नंबर दिया. वह मुंबई से मुजफ्फरपुर आ गयीं. सात दिनों तक हमलोग रेकॉर्डिग के लिए घूमते रहे. उन्हें यहां का लोक संगीत पसंद आया.- यशवंत पराशर, उत्तर बिहार प्रभारी, स्पिक मैके
फिल्म में मेरे गाये गीत जीय हो बिहार के लाला. काफी चर्चित हो गया है. बिहार की लोक संस्कृति को लोगों ने पसंद किया है. यह गर्व की बात है.- मनोज तिवारी, अभिनेता व गायक
-विनय
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