सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति कम उम्र की बालिकाओं को जिम्मेवार बनाना अन्याय : गीताश्री उरांव

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Oct 2014 11:02 PM

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चैंपीयंस आफ अर्ली मैरेज प्रोजेक्ट में सम्मानित की गयी झारखंड की बच्चियांबाल विवाह के खिलाफ आवाज उठा कर पढ़ाई को बनाया साधन@ रांचीमानव संसाधन मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा है कि कम उम्र की बालिकाओं को सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति जिम्मेवार बनाना अन्याय है. उन्होंने कहा कि कम उम्र की बच्चियों को परिवार और खानदान […]

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चैंपीयंस आफ अर्ली मैरेज प्रोजेक्ट में सम्मानित की गयी झारखंड की बच्चियांबाल विवाह के खिलाफ आवाज उठा कर पढ़ाई को बनाया साधन@ रांचीमानव संसाधन मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा है कि कम उम्र की बालिकाओं को सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति जिम्मेवार बनाना अन्याय है. उन्होंने कहा कि कम उम्र की बच्चियों को परिवार और खानदान की जवाबदेही सौंपे जाने से उनका समुचित विकास नहीं हो सकता है. मानव संसाधन मंत्री आज ब्रेकथ्रू संस्था की ओर से आयोजित सेलीब्रेशन फार चैंपियंस ऑफ अर्ली मैरेज प्रोजेक्ट को संबोधित कर रही थीं. होटल रेडीसन ब्लू में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सामाज की रूढ़ीवादी परंपरा का दंश गरीब परिवार की बेटियां झेल रही हैं. ऐसी बच्चियों में क्षमता है. वे अपने अधिकारों को बचाने के लिए आगे आयें. अपने सपनों को टूटने नहीं दें, क्योंकि उनमें दमखम है. श्रीमती उरांव ने कहा कि झारखंड सरकार ब्रेकथू्र की ओर से चलाये जा रहे अभियान को स्कूलों तक पहुंचाने में मदद करेगी. उन्होंने कहा कि झारखंड में बाल विवाह एक कुरीति है. इससे अल्प व्यस्क बच्चियों का मानसिक और शारीरिक विकास भी नहीं हो पाता है और कम उम्र में ऐसी बालिकाओं का विवाह कराना उन्हें खिलने से मसलने के समान है. ऐसी बच्चियों को जिम्मेवारी थोपा जाना गलत है. बच्चियों को पढ़ाना-लिखाना जरूरी है. किशोर-किशोरियों को सुविधा देने पर सरकार कभी पीछे नहीं हटेगी. बच्चियोंं और उनके अभिभावकों को भी यह ध्यान देना होगा कि सामाजिक परंपराओं को वे हावी नहीं होने दें. मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि ब्रेकथ्रू संस्था महिला, युवा वर्ग पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ मुहिम चला रही है. ऐसे मुहिम से जुड़ने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि समाज में अभिभावक कभी कभी ऐसे ताना-बाना में फंस जाते हैं, जिससे परिवार के मुखिया का सर झुक जाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड देश में ऐसा राज्य है, जहां कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्लस 2 तक की पढ़ाई हो रही है. स्कूल छोड़ चुकी बच्चियां अपनी पढ़ाई का सपना भी इन विद्यालयों से पूरा कर रही है. कार्यक्रम में मानव संसाधन मंत्री ने सिल्ली की लुपुंग गांव की रहनेवाली मोनिका, रांची की शिल्पा कुमारी, सिल्ली की ही तब्बू अफरोज और गया की रहनेवाली सुमन कुमारी को बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने और अपने माता-पिता को प्रेरित करने के लिए पुरस्कृत किया गया. संस्था की कंट्री हेड सोनाली खान ने कहा कि ब्रेकथ्रू 15 वर्षों से बाल विवाह और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रही है. खास कर घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, बाल विवाह और बालिकाओं पर होनेवाले अत्याचार के खिलाफ संस्था ने कई अभियान चलाये हैं. संस्था के चंद्रनाथ मिश्रा और अर्ली मैरेज प्रोजेक्ट के निदेशक कार्यान्वयन जोसी जोस ने भी मौके पर अपने विचार रखे.इन्हें किया गया सम्मानितसंस्था की ओर से मौके पर अर्ली मैरेज पर आधारित मोबाइल गेम भी प्रदर्शित किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्ट विद्यालय सिल्ली की प्राचार्य सावित्री महतो, अनगड़ा मध्य विद्यालय के शिक्षक मो इरफान अंसारी, हहाप नामकुम के मुखिया रमेश मुंडा समेत अन्य को उत्प्रेरक बनने के लिए पुरस्कृत किया गया.

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