नयी दिल्ली: वैश्विक मंदी और घरेलू मोरचे पर नीतिगत लाचारी का असर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर साफ दिखने लगा है. समाप्त वित्त वर्ष 2011-12 की मार्च में समाप्त चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि पिछले नौ साल के न्यूनतम स्तर तक गिर कर 5.3 प्रतिशत रह गयी. साथ ही सालाना जीडीपी वृद्धि भी घट कर 6.5 प्रतिशत पर आ गयी.
इससे पहले जारी अग्रिम आंकड़ों में 2011-12 की जीडीपी 6.9% रहने का अनुमान था. पहले के मुकाबले अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में वृद्धि की रफ्तार कम हुई है. 2010-11 में जीडीपी वृद्धि 8.4 फीसदी रही थी. केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा जारी आर्थिक वृद्धि के संशोधित आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में जीडीपी वृद्धि 6.5% रह गयी.
घटेगी नौकरी, बढ़ेगी..
इससे पहले संगठन ने 6.9 } वृद्धि का अग्रिम अनुमान जारी किया था. वर्ष 2002-03 के बाद से यह सबसे न्यूनतम आंकड़ा है जब आर्थिक वृद्धि 4 प्रतिशत रही थी. इस दौरान कृषि क्षेत्र की वृद्धि एक साल पहले के 7 प्रतिशत से घट कर 2.8 प्रतिशत, खनन क्षेत्र की पांच से घटकर शून्य से भी नीचे 0.9 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र की 7.6 प्रतिशत से घट कर 2.5 प्रतिशत और व्यापार, होटल तथा परिवहन क्षेत्र की वृद्धि 11.1 से घट कर 9.9 प्रतिशत रह गयी.
अब न चेते, तो..
रिजर्व बैंक विकास पर फोकस करता है, लेकिन महंगाई के कारण दरें घटाना मुश्किल है. हालांकि, दरों में थोड़ी कटौती की उम्मीद है. यदि जुलाई में आरबीआइ ब्याज दरों में कटौती नहीं करता है, तो हालात और खराब होंगे. सरकार को महंगाई घटाने के लिए मांग कम करने के बजाय सप्लाई बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए. यदि सरकार अब भी कदम नहीं उठाती है, तो हालात और बिगड़ेंगे.
| भारत की अर्थव्यवस्था रसातल में, बढ़ेगी महंगाई | ||
| विकास की रफ्तार जरूरत से ज्यादा धीमी होने का सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ने जा रहा है. विशेषज्ञ इसे आर्थिक मंदी की आहट मान रहे हैं. मंदी के दौरान कामकाजी लोगों की नौकरी तो बाद में जायेगी, सरकार ने नयी नियुक्तियों पर अभी से रोक लगा दी है. | ||
| असर | सरकार की तैयारी | लौट सकती है तेजी, बशर्त |
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►नौकरी पर संकट ►महंगाई कम करना मुश्किल ►पढ़ाई-लिखाई, इलाज सब महंगा होगा ►ईएमआई बढ़ जायेगी ►बचत कम हो जायेगी ►बाजार में पैसे कम आयेंगे ►आर्थिक मंदी की आशंका
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इधर, सरकार ने समस्या से निबटने के लिए कड़े कदम उठाने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री ने वित्तीय घाटा कम करने के लिए निम्न खर्चो में कटौती के आदेश दिये हैं. ►नये पदों पर नहीं की जायेगी नियुक्तियां
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►सुस्त औद्योगिक वृद्धि को मिले रफ्तार ►कर्ज सस्ता हो, जो फिलहाल मुश्किल लग रहा है ►रुपया मजबूत हो, महंगाई कम हो जाये ►कंपनियों को विदेशी शेयर बाजारों से पूंजी जुटाने की छूट मिले यह कदम उठाने होंगे उद्योगों को पैकेज दे ►खुद रुपये पर फोकस करे ►निवेश बढ़ाने के उपाय करे ►आर्थिक सुधार करे ►कैपिटल इनफ्लो बढ़ाये, ►प्रोडक्टिविटी बढ़ाये और घाटे पर काबू करे
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