।। अमन तिवारी ।।
लोहरदगा ,रांची : लोहरदगा पुलिस ने जमींदारों के साथ मिल कर किस्को थाना क्षेत्र के जोबांग गांव के असहाय और निदरेष लोगों को माओवादी करार दे दिया था. इसमें आदिवासी राजेंद्र मुंडा, महेंद्र उरांव, मुन्ना उरांव व श्यामल उरांव थे.
इस बात का खुलासा अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) की जांच में हुआ है. सीआइडी जांच का निर्देश राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग की अनुशंसा पर सीआइडी के एडीजी ने दिया था. जांच रिपोर्ट एडीजी को सौंप दी गयी है.
रिपोर्ट के मुताबिक जिन चारों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर भाकपा भाओवादी के जोनल कमांडर बलराम उरांव के दस्ते का सदस्य बताया था, वे दरअसल गांव में रहनेवाले गरीब आदिवासी हैं.
घटना के पहले से भी पुलिस रिकॉर्ड में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है. घटना के बाद भी उनका किसी प्रकार का संबंध माओवादियों या जोनल कमांडर बलराम उरांव से नहीं रहा है.
* क्या था मामला
लोहरदगा जिला के किस्को थाना क्षेत्र निवासी उदयनाथ शाहदेव के घर पर कुछ वर्ष पहले उग्रवादियों ने हमला किया था. हमले के बाद उग्रवादी उनके घर से धान समेत अन्य सामान लूट कर चले गये.
घटना के बाद उदयनाथ शाहदेव ने इसकी जानकारी भाई लाल इंद्रदेव नाथ शाहदेव को दी. उन्होंने घटना की सूचना पुलिस को दी. पुलिस सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंची,जहां से पुलिस ने बलराम उरांव के नाम एक माओवादी परचा पाया.
परचा के आधार पर पुलिस ने बलराम सहित अन्य अज्ञात के खिलाफ नक्सली होने का मामला दर्ज कर अनुसंधान करना उचित नहीं समझा, बल्कि जमींदारों के साथ मिलकर पुलिस ने बलराम सहित उक्त चारों के खिलाफ कांड संख्या 25/06 के तहत भादवि की धारा 147,148,149, 380, 436, 27 आर्म्स व 17/18 सीएएल एक्ट तहत प्राथमिकी दर्ज करा दी. इतना ही नहीं, चारों को पुलिस ने प्रताड़ित भी किया. प्रताड़ना से तंग आकर गरीब आदिवासियों ने अप्रैल 2012 में इसकी शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग से की. इसके बाद मामले की सीआइडी जांच हुई थी.
* सीआइडी की जांच में हुआ खुलासा
* एससी/एसटी आयोग के निर्देश पर हुई थी जांच
Post new comment