* लातेहार स्थित सिकनी कोलियरी साल भर से बंद
- सिकनी कोलियरी साल भर से बंद है. इससे कम से कम 40 हजार लोग बेरोजगार हो गये हैं. सरकार चाहे तो कुछ ही घंटों में कोलियरी में काम शुरू हो सकता है. पर राजनीतिक दावं-पेंच में मामला फंसा हुआ है. सिकनी लातेहार जिले की आर्थिक रीढ़ है. इसके बंद होने से जिलावासियों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. -
लातेहार : झारखंड राज्य खनिज विकास निगम द्वारा संचालित सिकनी कोलियरी पिछले जून-जुलाई से बंद है. इस कोलियरी पर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कम से कम 40 हजार लोग आश्रित हैं. पहले फेज में कोयला समाप्त होने के कारण कोलियरी को बंद किया गया था.
दूसरे फेज में 123 एकड़ वन भूमि में कोयला उत्खनन होना है. निगम को इसकी पर्यावरणीय स्वीकृति व सहमति चार माह पूर्व ही प्राप्त हो चुकी है. एनओसी मिलने के बाद भी निगम नये खनन क्षेत्र में उत्खनन नहीं कर पा रहा है. वर्ष 1989 से संचालित इस प्रोजेक्ट में मेसर्स संजय ट्रेडिंग द्वारा माइनिंग कार्य किया जाता रहा है.
क्यों नहीं हो पा रहा है चालू : जानकारों का दावा है कि सरकार चाहे तो सिकनी कुछ घंटों में चालू हो सकती है. स्थानीय विधायक व राज्य के कैबिनेट मंत्री वैद्यनाथ राम कई बार कोलियरी के दूसरे फेज का उदघाटन करने की बात कह चुके हैं.
सूत्रों का कहना है कि खान मंत्री खनन कार्य हेतु एजेंसी तय कर दें तो सिकनी कोलियरी तुरंत चालू हो सकती है. बताया जाता है कि सरकार वर्तमान खनन एजेंसी मे संजय ट्रेडिंग को इस कार्य से हटा कर नया टेंडर करना चाहती है.
लेकिन सरकार के हाथ गंठबंधन की डोर से बंधे होने के कारण निर्णय नहीं हो पा रहा है. हालांकि खनन कंपनी के पूर्व एकरारनामा के विस्तारीकरण हेतु महाधिवक्ता से कानूनी सलाह भी ली जा चुकी है.
* चार माह से 123 एकड़ नये खनन क्षेत्र में काम शुरू होने का इंतजार
शीघ्र खुलेगी सिकनी कोलियरी : राज्य के खान सचिव एके सरकार का कहना है कि सिकनी को लेकर वृहत योजना सरकार ने तैयार कर लिया है. शीघ्र ही खनन कार्य प्रारंभ होगा.
मालूम हो कि श्री सरकार ने पूर्व में कहा था कि खनन एजेंसी के नॉमिनेशन एवं टेंडर पर सरकार को निर्णय लेना है. पूर्व में कार्यरत मे संजय ट्रेडिंग ने इकारनामे की एक्सटेंशन की मांग करते हुए 123 एकड़ विस्तारित भूमि पर खनन का अधिकार मांगा था.
* सिकनी कोलियरी खोलने का निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में हो चुका है. आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही सिकनी प्रोजेक्ट में उत्खनन चालू हो जायेगा.
हेमंत सोरेन, खनन मंत्री
- ये हैं सिकनी कोलियरी पर आश्रित
* कोलियरी में 1200 मजदूर, 1176 ट्रकें, 1176 चालक, 1176 उप चालक, 155 डीओ होल्डर्स व 465 मुंशी निगम द्वारा निबंधित हैं.
* इनके अलावे 35 हजार लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं.
* कोलियरी बंद रहने से सिकनी, ब्रह्मणी, सांसग, आन, भरिला, जगलदगा, उदयपुरा, टुड़हामू व चंदवा में सैकड़ों ढाबा, मोटर पाटर्स दुकान, गैरेज, ठेला-खोमचेवालों की रोजी-रोटी बंद हो गयी है
* सिर्फ कागजी प्रक्रिया बाकी
- पहले फेज में कोयला खत्म होने के बाद बंद हो गयी थी कोलियरी
- दूसरे फेज में 123 एकड़ वन भूमि में कोयला उत्खनन होना है
- इसके लिए एनओसी चार माह पहले ही मिल चुका है
- कोलियरी खोलने का निर्णय कैबिनेट में भी हो चुका है
- राजनीतिक दावं-पेंच में फंसा है मामला
* सरकार को हर माह मिलता था दो करोड़ रुपये टैक्स
सिकनी कोलियरी बंद होने से राज्य सरकार को प्रत्येक माह लगभग दो करोड़ रुपये रॉयल्टी मद में तथा 15 लाख रुपये सेल्स टैक्स मद में नुकसान हो रहा है. सिर्फ स्थापना मद में निगम को प्रत्येक माह 10 लाख रुपये का भुगतान बगैर काम कराये
अपने कर्मियों को करना पड़ रहा है.
- ट्रकों को फाइनेंसरों ने खींचा
सिकनी कोलियरी के बंद होने के कारण दर्जनों नये ट्रक ऑनर परेशानी में फंस गये हैं. नया ट्रक खरीदने में लाखों रुपये लगा कर वे कजर्दार बन बैठे हैं. महीनों किस्त का भुगतान नहीं करने और बैठे बिठाये भारी भरकम टैक्स भरने से उनकी हालत खराब हो गयी है. ऊपर से फाइनांसर इनके ट्रकों को खींचते जा रहे हैं.
।। सुनील कुमार ।।
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