भूपति और बोपन्ना तानाशाही रवैया अपना रहे हैं

नई दिल्ली : भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने आज महेश भूपति और रोहन बोपन्ना को लताडते हुए कहा कि वे अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) पर लंदन ओलंपिक के लिये टीम चयन में तानाशाही रवैया अपना रहे हैं. किसी भी खिलाडी को ‘विशेषाधिकार’ देने की अनुमति नहीं देनी चाहिए.

आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष वी के मल्होत्रा ने भूपति और बोपन्ना की ओर साफ इशारा करते हुए कहा, ‘‘मैं खिलाडियों का नाम नहीं लेना चाहता लेकिन किसी भी खिलाडी को टीम चयन में विशेषाधिकार नहीं देना चाहिए.’’ मल्होत्रा ने खिलाडियों के दबाव में झुकने वाले एआईटीए की भी आलोचना की और कहा कि ओलंपिक में दो पुरुष टीमों को भेजने का फैसला अन्य महासंघों के लिये भी गलत उदाहरण पेश करता है.

उन्होंने कहा, ‘‘एआईटीएफ को उनकी (भूपति और बोपन्ना) धमकियों को तवज्जो नहीं देनी चाहिए थी.’’मल्होत्रा ने कहा, ‘‘आज का फैसला अन्य महासंघों के लिये गलत उदाहरण पेश करेगा. खिलाडियों का चयन करना महासंघों का काम है. आईओए भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करता. खिलाडी महासंघ पर अपनी तानाशाही नहीं चला सकते.

मुझे उम्मीद है कि टेनिस संघ का आज का फैसला मिसाल नहीं बन जाये क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय खेलों के लिये निश्चित रुप से खराब होगा.’’ उन्हें यह भी लगता है कि पेस के वर्धन के साथ तथा भूपति के बोपन्ना के साथ जोडी बनाने से भारत पदक जीतने का मौका भी गंवा देगा. मल्होत्रा ने कहा, ‘‘निश्चित रुप से इससे भारतीय पदक की उम्मीद पर असर पडेगा.’’

This Article Posted on: June 21st, 2012

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