ममता ने रुख सख्त किया, समझौते से इनकार

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से संप्रग सरकार से समर्थन वापसी के निर्णय को बदले जाने का आज कोई संकेत नहीं मिला क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से सुधारों के लिए किये गए प्रमुख निर्णयों को वापस लेने की अपनी मांगों पर कोई भी समझौता करने से इनकार कर दिया.

ममता ने संप्रग से समर्थन वापसी और पार्टी के मंत्रियों के सरकार से हटने की घोषणा के एक दिन बाद यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं अपने पहले के रुख पर कायम हूं, चाहे जो भी हो.(तृणमूल कांग्रेस) मंत्री अपने त्यागपत्र देंगे.’’

उन्होंने वित्त मंत्री पी चिदंबरम के दिल्ली में सुबह दिये बयान को खारिज करते हुए संवाददाताओं से कहा कि केंद्र की ओर से डीजल मूल्यवृद्धि, सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती और खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के बारे में केंद्र के निर्णय से पहले और बाद में दिल्ली से किसी ने भी उनसे सम्पर्क नहीं किया.
       
ममता ने कहा, ‘‘एक परिवार को वर्ष में न्यूनतम 24 सिलेंडर मिलने चाहिए. आप पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कितनी बार बढाते रहेंगे? खुदरा में एफडीआई के निणर्य को भी वापस लिया जाए.

ममता ने कहा कि केंद्र की ओर से एफडीआई पर निर्णय किये जाने के दिन 14 सितम्बर को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताया था कि उनकी पार्टी इन निर्णयों के खिलाफ है. उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बयान कि राजनीतिक दलों के बीच आमसहमति नहीं बनने तक खुदरा में एफडीआई लागू नहीं होगा का उल्लेख किया और कहा कि यह वह प्रतिबद्धता है जिसपर सरकार को दृढ रहना चाहिए.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि सरकार को खुदरा में एफडीआई पर कोई भी निर्णय इस संबंध में संसद में विधेयक पारित होने के बाद ही करना चाहिए. ‘‘हम एफडीआई पर सहमत नहीं हैं. हम प्रतिदिन विरोध प्रदर्शन करेंगे.’’ममता ने कल रात घोषणा की थी कि उनकी पार्टी आर्थिक निर्णयों के खिलाफ संप्रग से अपना समर्थन वापस ले रही है और अपने मंत्रियों को वापस बुलाएगी.

उन्होंने कहा था कि वह अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकती हैं बशर्ते सरकार डीजल के दाम में की गई पांच रुपये प्रतिलीटर की वृद्धि में तीन से चार रुपये प्रतिलीटर की कटौती करे, एफडीआई पर निर्णय को पूरी तरह वापस ले और सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलेंडरों को सीमित करने के निर्णय को वापस ले.’’

ममता ने कहा कि उन्होंने सोनिया को बताया था कि उनकी पार्टी इन निर्णयों का समर्थन नहीं कर सकती तथा वह यह देखें कि ‘‘हमारा गठबंधन ना टूटे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं मुद्दों पर समझौता नहीं कर सकती. ये आम जनता से जुडे हैं. यदि राजनीतिक पार्टियां जनता की भावनाओं पर ध्यान नहीं देती, यदि मैं लोगों से धोखा करुं तो मेरा कोई अस्तित्व नहीं रहेगा.’’

उन्होंने यह कहते हुए केंद्र पर हमला बोला कि उसकी यह आदत बन गई है कि वह पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में सात.आठ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करता है और उसके बाद उसमें एक रुपये की कमी करके यह दावा करता है कि हमने उसमें कमी कर दी है. उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने वर्ष 1992 में सुधार शुरु किया था. वे अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों का हवाला देते हुए अभी भी कीमतें बढा रहे हैं. सुधार यदि आम जनता के लिए नहीं हैं तो किस लिए हैं. सुधार जमीनी स्तर से होने चाहिए आसमान से नहीं.’’

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता ने कहा कि खाद की कीमतों में 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो कि किसान विरोधी है. उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि एक महीने पहले वह संप्रग समन्वय समिति की बैठक के लिए राजधानी दिल्ली में थीं, अब समन्वय कहां है. अब समन्वय आदेश बन गया है.’’ उन्होंने कांग्रेस से कहा कि संप्रग एकल पार्टी सरकार नहीं है लेकिन उन्होंने सभी निर्णय एकतरफा तौर पर लिये गए.

ममता ने दिल्ली से आयी उन खबरों कि प्रधानमंत्री ने उनसे सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन नहीं कर सके, कहा कि कोई सम्पर्क नहीं किया गया. उन्होंने चिदंबरम के दिल्ली में दिये गए बयान को मानने से इनकार किया कि पीएमओ ने डीजल और खुदरा में एफडीआई संबंधी निर्णयों पर उनसे सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो पाया. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुदरा में एफडीआई को अनुमति देने के निर्णयों के बारे में कभी भी सूचना नहीं दी गई. मैं कांग्रेस नेताओं से अनुरोध करती हूं कि वे तथ्यों को तोड मरोड कर पेश नहीं करें. उन्हें सच्चाई पेश करनी चाहिए.’’

ममता ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि राजनीतिक नेताओं का सम्मान कैसे किया जाता है. मैंने उस ‘लक्ष्मणरेखा’ का सम्मान किया है.’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब चैनलों को नियंत्रित करना चाहती है लेकिन वे हमें नियंत्रित नहीं कर सकते.’’मुकुल राय ने कहा, ‘‘एक कैबिनेट मंत्री के रुप में मुझे कई बाद प्रधानमंत्री की ओर से पीएमओ से संदेश प्राप्त करने के लिए कहा गया लेकिन इस बारे में मुझे पीएमओ की ओर से अपनी पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को संदेश देने के लिए कोई संदेश नहीं मिला.’’

-ममता ने सरकार के बयान को चुनौती दी-       

This Article Posted on: September 20th, 2012 in : Sections.

The need of the hour is that all opposition leaders must join hands together to against this decision of central govt. which is against the interest of INDIANS

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