सूक्ष्म सिंचाई परियोजना: जांच रिपोर्ट में हुई पुष्टि, अधिकारी व कंपनी ने मिल कर की गड़बड़ी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Jan 2015 5:50 AM

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रांची: कृषि विभाग के अधिकारी और आपूर्तिकर्ता कंपनी के लोगों ने मिल कर सूक्ष्म सिंचाई योजना (ड्रिप एरीगेशन) में गड़बड़ी की है. इसका खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ है. जांच तत्कालीन कृषि निदेशक केके सोन के निर्देश पर रांची स्थित प्रसार प्रशिक्षण केंद्र के पूर्व प्रभारी सुनील कुमार ने की थी. कृषि निदेशक ने लोकायुक्त […]

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रांची: कृषि विभाग के अधिकारी और आपूर्तिकर्ता कंपनी के लोगों ने मिल कर सूक्ष्म सिंचाई योजना (ड्रिप एरीगेशन) में गड़बड़ी की है. इसका खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ है. जांच तत्कालीन कृषि निदेशक केके सोन के निर्देश पर रांची स्थित प्रसार प्रशिक्षण केंद्र के पूर्व प्रभारी सुनील कुमार ने की थी. कृषि निदेशक ने लोकायुक्त के यहां से हुई शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच करायी थी.
नौ जिलों में की गयी जांच : जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि गड़बड़ी के पूरे मामले में कृषि विभाग के अधिकारी और आपूर्तिकर्ता की मिलीभगत थी. जांच के लिए गठित टीम ने रांची, लोहरदगा, गुमला, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू, लातेहार और देवघर में योजना की पड़ताल की थी. इन जिलों में जैन एरीगेशन सिस्टम लिमिटेड के अधिकृत विक्रेता सौम्या एग्रोटेक से काम कराया गया था.

आधे काम पर ही कर दिया भुगतान : जांच टीम ने पाया कि लोहरदगा जिले के इटा ग्राम में योजना के तहत काम किया गया ही नहीं था. कई स्थानों पर आधा-अधूरा सिस्टम लगाया गया था. इसके बाद भी तत्कालीन जिला उद्यान पदाधिकारी ने कंपनियों को राशि का भुगतान भी कर दिया.

घर में सिस्टम छोड़ गये थे कंपनी के लोग : जांच के क्रम में टीम के सदस्य इटा ग्राम स्थित पूनम देवी के घर गये थे. पूनम के घर के लोगों ने बताया था कि सिस्टम देने के तीन-चार माह तक कोई आदमी नहीं आया. फर्टिलाइजर टैंक और दो बंडल पाइप पड़ा हुआ है. घर के लोगों ने बताया कि कंपनी का एक व्यक्ति कागज पर हस्ताक्षर करा कर ले गया था. उसके बाद खाते में 44341 रुपये आया था और करीब 10 दिन के बाद एकाउंट से राशि निकाल ली गयी. जांच टीम ने इसके दावे को सही पाया.

जांच में इन बातों का हुआ खुलासा
तत्कालीन उप निदेशक सह क्षेत्रीय नोडल पदाधिकारी ने निजी स्वार्थ में कंपनियों का निबंधन किया
तकनीकी व वित्तीय बीड के निष्पादन के लिए कोई समिति का गठन सरकारी स्तर पर नहीं किया गया
क्षेत्रीय नोडल पदाधिकारी की अधिसूचना जांच
समिति को नहीं उपलब्ध करायी गयी
नोडल पदाधिकारी का कोई अनुश्रवण व पर्यवेक्षण प्रतिवेदन कार्यालय में उपलब्ध नहीं था
लाभुकों की सूची वेबसाइट में प्रकाशित करने का जिक्र था, पर ऐसा नहीं किया गया
कई लाभुकों के यहां सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम या तो लगाये नहीं गये या आधे-अधूरे कार्य कराये गये
तत्कालीन जिला उद्यान पदाधिकारी ने बिना सिस्टम लगाये इसका प्रमाण पत्र भी दे दिया था
बिना सिस्टम लगाये कंपनियों को राशि का भुगतान कर दिया गया
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन में (30.03.13) को लोहरदगा जिले को 7.40 करोड़ की योजना स्वीकृत कर दी
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