बाहरी को नौकरी, तो ठप करायेंगे व्यवस्था: हेमंत सोरेन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Feb 2015 7:07 AM

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दुमका: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि इस सरकार के रहते आदिवासियों-मूलवासियों को नौकरी नहीं मिल सकती. इस सरकार में न जमीन हमारी रहेगी, न नौकरी मिलेगी. हेमंत सोरेन झामुमो के 36 वें स्थापना दिवस पर दुमका के गांधी मैदान में सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा : […]

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दुमका: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि इस सरकार के रहते आदिवासियों-मूलवासियों को नौकरी नहीं मिल सकती. इस सरकार में न जमीन हमारी रहेगी, न नौकरी मिलेगी. हेमंत सोरेन झामुमो के 36 वें स्थापना दिवस पर दुमका के गांधी मैदान में सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा : युवा कॉलेज का रास्ता छोड़ कर संघर्ष का रास्ता अपनायें. नौकरी के लिए हमारे झारखंड के लोग बिहार जाते हैं, तो मार खाते हैं.

पश्चिम बंगाल जाते हैं, तो उनका सिर फोड़ दिया जाता है. हमें भी विरोध करना होगा. उन्होंने कहा : सरकार ने कानून को बदलने का काम नहीं किया, तो झामुमो पूरे राज्य में आंदोलन करेगा. राज्य में व्यवस्था को ठप करायेगा. राज्य लेने के लिए जैसे हमने आर्थिक नाकेबंदी की थी, वैसे ही आंदोलन करना होगा. हेमंत सोरेन ने कहा : अस्मिता से खिलवाड़ हुआ और आदिवासियों ने हथियार उठा लिये, तो पुलिस भी किसी काम की नहीं रहेगी. जब-जब हमने संघर्ष किया है, मुंहतोड़ जवाब देने का काम किया है. हम इस सरकार को भी मुंहतोड़ जवाब देंगे.

केरोसिन के दाम क्यों नहीं घटे
हेमंत सोरेन ने कहा : एक माह में ही भाजपा सरकार के लक्षण दिखने लगे हैं. साफ हो चुका है कि सरकार आदिवासी-मूलवासी विरोधी है. सत्ता में आने के बाद पहला काम बड़े घरानों को आगे बढ़ाने का किया है. देश का राजनीतिक चेहरा बन कर व्यापारी बैठे हैं. उनकी नजर जल, जंगल और जमीन पर है. गरीबों के लिए महंगाई कुछ कम नहीं हुई है. पेट्रोल-डीजल के दाम घटे, तो केरोसिन के क्यों नहीं, जिससे आदिवासियों के घरों में रोशनी आती है. दुमका में प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोई माय का लाल नहीं है, जो आदिवासियों की जमीन ले सके. वहीं सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाकर धोखे से जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है. अगर अध्यादेश लागू हुआ, तो जमीन लेने के लिए उसके मालिक से पूछने की जरूरत नहीं रहेगी.
दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन संविधान सम्मत
दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन संविधान सम्मत है. संविधान भारतीय नागरिकों को देश के किसी भी राज्य में नौकरी करने का अधिकार देता है. झारखंड में शिक्षक पद पर बहाली के लिए जनजातिय व क्षेत्रीय भाषा के साथ टेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का चयन सही है. नियुक्ति के लिए प्रकाशित विज्ञापन में स्थानीयता की कोई बात नहीं कही गयी. कई मामले हाइकोर्ट में दायर हुए, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया को सही ठहराया गया. झारखंड में अब तक स्थानीय नीति भी लागू नहीं हो पायी है. पूर्व में डोमेसाइल नीति को हाइकोर्ट रद्द कर चुका है.
राजीव कुमार, अधिवक्ता, झारखंड हाइकोर्ट
छत्तीसगढ़ में क्या है प्रावधान
छत्तीसगढ़ में राज्य गठन का दिन स्थानीयता का कट ऑफ डेट निर्धारित किया गया है. इसी कट ऑफ डेट के आधार पर नियुक्तियों में प्राथमिकता तय की जाती हैं.
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पूर्ववर्ती सरकार में,बाहरी को मिली थी शिक्षकों की नौकरी
रांची: झारखंड में पूर्ववर्ती सरकारों में भी दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को नौकरियां मिलती रही हैं. वर्ष 2003, 2008, 2010 और 2012 में शिक्षकों की नियुक्तियां हुई थी. इनमें दूसरे राज्यों के कई अभ्यर्थियों को सफलता मिली थी. वर्ष 2012 में राज्य के प्लस टू उच्च विद्यालयों में आठ विषयों में 1800 रिक्तियों के लिए परीक्षा ली गयी थी. इस परीक्षा के जरिये 1233 शिक्षकों का चयन हुआ था. हिंदी और संस्कृत में 230-230 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा ली गयी थी. इनमें 115 पद अनारक्षित श्रेणी के थे. हिंदी में अनारक्षित पद के लिए 100 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था, जिनमें 65 झारखंड के बाहर के थे. संस्कृत विषय में यह संख्या बढ़ कर 76 हो गयी. हिंदी में अनारक्षित कोटी में सफल अधिकतर अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश, बिहार, ओड़िशा और राजस्थान से थे. जिस समय ये नियुक्तियां हुईं, राज्य की सरकार में झामुमो भी शामिल थी.
झारखंड
वर्ष 2003, 2008, 2010 और 2012 में शिक्षकों की नियुक्तियां हुई थी
2012 में प्लस टू हाइस्कूलों में हिंदी में 65 और संस्कृत में 70 फीसदी अनारक्षित पदों पर नियुक्त हुए थे दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी
उत्तर प्रदेश, बिहार, ओड़िशा और राजस्थान के लोगों को भी मिली नौकरी
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