किसानों की आवाज से राज परिवार की विरासत तक, महाराज धनंजय विक्रम शाह को नम आंखों से विदाई
रामपुर राज परिवार के महाराज धनंजय विक्रम शाह का निधन हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है. किसानों के मुद्दों पर उनकी अहम भूमिका और सरल व्यक्तित्व को याद किया जा रहा है. उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए.
West Champaran News: रामनगर राज परिवार के महाराज धनंजय विक्रम शाह का दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया. 66 वर्षीय धनंजय विक्रम शाह पिछले करीब पांच महीने से अस्वस्थ चल रहे थे. उनके निधन की खबर मिलते ही रामनगर समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. बुधवार देर रात पार्थिव शरीर राज परिवार के आवास पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े.
Ramnagar News: अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
महाराज धनंजय विक्रम शाह के पार्थिव शरीर के राज परिवार के आवास पहुंचते ही हजारों प्रबुद्धजन, समाजसेवी, अधिकारी, जनप्रतिनिधि और आम लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. लोगों ने उनके निधन को रामनगर के सामाजिक जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत बताया.
राज परिवार की विरासत के बावजूद रहा सरल व्यक्तित्व
धनंजय विक्रम शाह रामनगर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राजा नारायण विक्रम शाह और रानी जयन्ती शाह के पुत्र तथा 'राम राजा' के पौत्र थे. राज परिवार की प्रतिष्ठा और विरासत से जुड़े होने के बावजूद उनका व्यक्तित्व बेहद सहज और सरल रहा. आम लोगों के बीच उनकी पहचान मिलनसार, सादगी पसंद और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में थी.
किसानों के मुद्दों को लेकर निभाई अहम भूमिका
रामनगर के किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर धनंजय विक्रम शाह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. चीनी मिल के विरुद्ध किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर उन्होंने किसानों की आवाज को मजबूती से उठाया था. इस आंदोलन के बाद किसानों और आम लोगों के बीच उनकी अलग पहचान बनी.

राज परिवार के मंदिरों में अंतिम दर्शन
अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को राज परिवार के दुर्गा मंदिर और नर्मदेश्वर महादेव मंदिर ले जाया गया. यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, शुभचिंतकों और समर्थकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की. लोगों ने महाराज की पत्नी रानी अनु शाह, पुत्र दुष्यंत विक्रम शाह समेत परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की.
त्रिवेणी संगम पर हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम तट पर किया गया. अंतिम विदाई में रामनगर समेत आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग शामिल हुए. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया.
जनसरोकारों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
स्थानीय लोगों ने कहा कि धनंजय विक्रम शाह का सरल व्यवहार, जनसरोकारों से जुड़ाव और किसानों के हित में किए गए प्रयास लंबे समय तक याद किए जाएंगे. उनके निधन से रामनगर ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जिसने राज परिवार की विरासत के साथ आम लोगों से भी मजबूत जुड़ाव बनाए रखा था.
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