एमजीसीयू के प्रो. अंजनी कुमार झा की नई पुस्तक प्रकाशित, जनजातीय इतिहास पर पेश किया गहन शोध

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बिरसा मुंडा पर नई पुस्तक: एम.जी.सी.यू. प्रो. झा का शोध

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के डॉ. अंजनी कुमार झा द्वारा लिखित नई पुस्तक 'बिरसा मुंडा और राष्ट्रीय आंदोलन' प्रकाशित हुई है. यह पुस्तक जनजातीय नायक बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनके योगदान का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है.

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Motihari News: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के मीडिया अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. अंजनी कुमार झा की नई पुस्तक 'बिरसा मुंडा और राष्ट्रीय आंदोलन' प्रकाशित हो गई है. यह पुस्तक भारत के महान जनजातीय नायक बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान का तथ्यपरक एवं विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है. पुस्तक के प्रकाशन पर विश्वविद्यालय के कुलपति सहित शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी है.

बिरसा मुंडा के संघर्ष का विस्तृत अध्ययन

पुस्तक में बिरसा मुंडा के संघर्ष के विभिन्न चरणों, औपनिवेशिक शासन के खिलाफ उनके आंदोलन तथा जनजातीय समाज में राष्ट्रीय चेतना के विकास का विस्तृत विश्लेषण किया गया है. इसके अलावा टाना भगत आंदोलन, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन सहित कई महत्वपूर्ण जनआंदोलनों का भी समग्र विवेचन किया गया है.

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कई जनजातीय वीरों के योगदान का उल्लेख

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इस पुस्तक में तिलका मांझी, रघुनाथ महतो, सिंगराय मानकी, बिंदुराय मानकी, सुरगा मुंडा, काते एवं बिंजी राय, बुद्ध भगत, बुली महतो, गंगा नारायण सिंह, चानकू महतो, नीलाम्बर-पीताम्बर तथा ठाकुर विश्वनाथ शाही जैसे अनेक जनजातीय वीरों के संघर्ष और योगदान को भी विस्तार से शामिल किया गया है.

दो दशक से शिक्षण और शोध में सक्रिय

डॉ. अंजनी कुमार झा पिछले दो दशकों से शिक्षण, पत्रकारिता और शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अब तक उनकी 25 से अधिक पुस्तकें तथा हजारों लेख और शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं. यह नई पुस्तक भी जनजातीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन पर शोध करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है.

कुलपति और शिक्षकों ने दी बधाई

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने पुस्तक के प्रकाशन पर डॉ. झा को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक साबित होगी. मीडिया अध्ययन विभाग के डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ. साकेत रमण, डॉ. सुनील दीपक घोडके, डॉ. उमा यादव एवं डॉ. मयंक भारद्वाज ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं. जयपुर के लिटरेरी सर्किल द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का प्रथम संस्करण वर्ष 2026 में प्रकाशित हुआ है.

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अमृतेश कुमार

लेखक के बारे में

By अमृतेश कुमार

अमृतेश 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. खबर पर हमेशा पैनी नजर रखने वाले अमृतेश को क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. वर्तमान में ये डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में अपनी लेखनी के जरिए लगातार सक्रिय हैं.

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