Wednesday, September 08, 2010 7:52:36 PM
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ओत्मक अनुभूति देता है सूफी संगीत
जिक इंडस्ट-ी में अपने पांव जमाने की कोशिश में जुटी सूफी गायिका पार्वती कुमारी ने हाल ही में सारेगामा की ओर से अपना नया एलबम बरसे-बरसे नयना लांच किया. झारखंड (धनबाद) से ताल्लुक रखनेवाली पार्वती कुमारी मुंबई के अलावा अन्य शहरों में भी अपने एलबम का प्रचार कर रही हैं. बरसे-बरसे नयना में उस नायिका की पीड़ा है, जिसे सुकून की तलाश है. चाहे वह प्रियतम से मिलने की तड़प हो या खुदा से जुड़ने की बेचैनी, हर लम्हा उसे पाने की लालसा में बीतता है.पार्वती जब सिर्फ दस साल की थीं, तभी से उनकी सांगीतिक यात्रा शु हो गयी थी. वह अपने शहर में भजन गाया करती थीं. उन्होंने संगीत की शिक्षा गंधर्व महाविद्यालय से ली और म्यूजिक में बीए दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया. ओबदा परवीन का संगीत सुनने के बाद सूफी संगीत की तरफ उनका झान बढ़ा. जिसके बाद सूफी संगीत की शिक्षा गुरु चांद फ़रीदी निजामी से दिल्ली में लेनी शु की. पार्वती के अनुसार गुरु निजामी बंधुओं के आशीर्वाद से सूफी संगीत की खिदमत का मौका मिला है. उनसे शब्दों को सुरों में पिरोने की कला सीखी. सूफ़ी संगीत के शहंशाह नुसरत फ़तेह अली खान की आवाज से भी पार्वती काफी प्रभावित हैं.पार्वती का मानना है कि सूफ़ी संगीत इतना पाक है कि यह खुदा से जोड़ता है. इसमें वह शक्ति है, जो सिर्फ़ श्रोताओं को ही नहीं, कलाकार को भी ओत्मक अनुभूति प्रदान करता है. इन्होंने कई वरिष्ठ शास्त्रीय गुरुओं मिट्ठू घोष, शारदा प्रसन्ना आचार्य व मधुप मुल से संगीत की बारीकियां सीखी हैं.पार्वती कहती हैं, ‘अभी मैं सूफ़ी संगीत यात्रा के जिस पड़ाव पर हं, अच लग रहा है. मगर अभी मुङो और आगे जाना है और सूफ़ी की रूह को जन-जन तक पहंचाना है.’ बाबा बुल्ले शाह और अमीर खुसरो की समृद्ध सूफ़ी काव्य परंपरा की यह तहेदिल से इबादत करती हैं. उनके दिल से निकला एक-एक शब्द दिल को ू लेनेवाला है. ये शब्द जब सुरों में ढल जाते हैं, तो माहौल सूफ़ियाना हो जाता है. सच ही कहते हैं कि सूफ़ी संगीत खुदा से जोड़ता है.पार्वती के अनुसार तीन सालों तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद साजिद-वाजिद ने पहली बार इन्हें सुना और गौरव इसार से मिलाया, जिन्होंने सारेगामा इंडिया लिमिटेड में मौका दिया. सारेगामा अंडरग्राउंड सिरीज से होते हुए पार्वती अब अपना अलग मुकाम बनाने की राह पर अग्रसर हैं.
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हां, बचपन में यही बात सुनते थे तुम्हारी दादी मां से..
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