अच्छी बात है कि बीते कई सालों से कोई न कोई दिन किसी न किसी रूप में मनाया जाता है. 22 सितंबर को भी कार विश्राम दिवस (फ्री कार डे) मनाया जाता है. पहले की तरह इस साल भी पूरे अवकाश दिवस के रूप में इसे मनाया गया.
कारों के इस विश्राम से निश्चित रूप से बढ़ते प्रदूषण में काफी सुधार के साथ सड़कों और गलियों में जाम-हादसों में भी कमी आयी. एक समय था, जब धरतीपुत्र किसान अपने हल और गाड़ी में चलनेवाले बैलों को भी अमावस्या और मकर सक्रांति के दिन पूरा अवकाश देते थे.
इससे बेचारे किसानों को भी एक दिन कड़ी मेहनत से कुछ आराम मिलता था. आज कारों के लिए विश्राम दिवस तो मनाया जाता है, लेकिन अन्य भारी वाहनों और इनके चालकों को ऐसा अवकाश नहीं दिया जाता. इसके पीछे शायद कारण यह हो कि उन्हें अवकाश देने से करोड़ों रुपये की हानि होगी. आज बड़े वाहनों और चालकों को िवश्राम क्यों नहीं दिया जाता?
– वेद प्रकाश, मामूरपुर, नरेला