Modi Surname Row | Surname vs Title vs Caste : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरनेम यानी उपनाम ‘मोदी’ के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) दोषी करार दे दिये गए. सूरत जिला अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को ‘मोदी सरनेम’ पर उनकी टिप्पणी को लेकर दायर आपराधिक मानहानि मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा (आईपीसी) 499 और 500 के तहत दोषी ठहराते हुए गुरुवार को उन्हें दो साल की सजा सुनायी. इसे लेकर खबरों की दुनिया में दिनभर गहमागहमी रही. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल भी उठे कि सरनेम क्या होता है. सरनेम और टाइटल में क्या अंतर है? अगर आप भी इन सवालों से दो-चार होते हैं, तो आइए इसे आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं.
सरनेम, टाइटल और कास्ट का चक्कर
सरनेम (Surname), टाइटल (Title) और कास्ट (Caste) के चक्कर में कई लोग फंस जाते हैं. कई लोग इसे एक ही चीज समझते हैं. लेकिन सरनेम, टाइटल और कास्ट – तीनों अलग अलग चीजें हैं. सबसे पहले तो सरनेम, टाइटल और कास्ट को हिंदी में समझ लेते हैं. सरनेम का मतलब हिंदी (Surname in Hindi) में उपनाम होता है. वहीं, टाइटल (Title in Hindi) का मतलब उपाधि होता है. कास्ट (Caste in Hindi) का मतलब तो आपको पता ही होगा. जी हां, कास्ट का मतलब जाति होता है.
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नाम के साथ उपनाम, उपाधि या जाति क्यों लगाते हैं?
बढ़ती जनसंख्या के साथ एक नाम के हजारों व्यक्ति मिल जाते हैं. ऐसे में केवल नाम से व्यक्ति की आसानी से पहचान नहीं होती. उपनाम या जाति का नाम लगाने से व्यक्ति की अलग पहचान होती है. आसान भाषा में हम इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आपके ऑफिस में एक नाम के कई लोग होंगे. ऐसे में नाम के साथ उपनाम, उपाधि या जाति लोगों को एक अलग पहचान देते हैं. उदाहरण के लिए आपको एक स्कूल में राहुल नाम के कई बच्चे मिल जाएंगे. लेकिन राहुल के साथ सिंह या शर्मा या कोई और सरनेम लगा हो तो बच्चे की पहचान आसान हो जाती है.
सरनेम क्या होता है ?
हिंदी में सरनेम को उपनाम कहते हैं. नाम के बाद आने वाला नाम ही उपनाम है यानी सरनेम है. उदाहरण के लिए क्रिकेटर विराट कोहली के नाम में विराट नाम है, लेकिन कोहली सरनेम है. यानी नाम के बाद जो लगे, वही सरनेम यानी उपनाम है. सरनेम को कई लोग जाति से भी जोड़ते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकांश उपनाम पूर्वजों या फिर जातियों से ही जुड़े होते हैं. जैसे- लालू यादव के नाम में देख लीजिए. लालू नाम है और यादव उपनाम है, जो उनकी जाति है. लेकिन कई जगह पर उपनाम सिर्फ एक नाम भी हो सकता है. जैसे आपको कई लोग ऐसे मिल जाएंगे, जिनका दो नाम होता है. जैसे- सौरभ सुमन. इसमें सौरभ तो नाम हो गया और बाद में आया सुमन सरनेम यानी उपनाम हो गया. ऐसे में यह जरूरी नहीं कि सरनेम कोई जाति ही हो. नाम के बाद बाद जो भी लगेगा, वह सरनेम है.
कास्ट और टाइटल यानी जाति और उपाधि में क्या अंतर है?
कास्ट और टाइटल यानी जाति और उपाधि में भी बड़ा अंतर है. कास्ट यानी जाति का मतलब यह हुआ कि जिस समाज या समुदाय में आप जन्मे हैं, उसका एक नाम होता है. यह प्राय: वर्ण व्यवस्था पर आधारित होता है. जैसे- चौबे, सिंह, शर्मा, अहमद, ढिल्लों, स्मिथ इत्यादि.
वहीं, टाइटल को हिंदी में उपाधि कहते हैं. यह किसी को सम्मानपूर्वक दी जाती है. जैसे अंग्रेजों के जमाने में सर, राय बहादुर, खान आदि की उपाधियां दी जाती थीं. आज के जमाने में उपाधि अर्जित भी की जाति है. जैसे डॉक्टर, प्रोफेसर इत्यादि. आम बोलचाल की भाषा में कई लोग टाइटल का मतलब उपनाम या जाति से भी लगा लेते हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है.
नाम में अगर कई शब्द हों तो सरनेम किसे मानेंगे ?
कई लोगों के नाम में दो तीन उपनाम होते हैं. जैसे- अमिताभ बच्चन के पिता जी हरिवंश राय बच्चन का नाम. एक और ताजा उदाहरण है प्रियंका चोपड़ा की बेटी का नाम, जो है मालती मैरी चोपड़ा जोनस (Malti Marie Chopra Jonas). अब आप इसमें सोचेंगे कि इसमें तो चोपड़ा और जोनस दोनों आ गए. नाम के शुरू में मैरी है और सबसे अंत में जोनस है. अब इसमें सरनेम यानी उपनाम किसे कहेंगे? इसका जवाब यह है कि इसमें उपनाम है जोनस. जो शब्द नाम के सबसे अंतिम में आयेगा, वही सरनेम माना जाएगा. भले ही किसी के नाम में चाहे 50 शब्द ही क्यों ना हों, जो सबसे अंत में आयेगा वही सरनेम माना जाएगा.