राजधानी रांची के बाहरी इलाकों में लोडशेडिंग की समस्या खत्म हो गयी है. 10 मार्च को तेज आंधी-पानी के कारण रिंग रोड से सटी दो जगहों पर कांके ग्रिड को हटिया-2 से जोड़नेवाले 132 केवीए के चार ट्रांसमिशन टावर जमीन पर आ गिरे थे. घटना के 17वें दिन सोमवार को झारखंड बिजली संचरण निगम लिमिटेड ने चारों टावरों को दोबारा अपनी जगह पर स्थापित कर दिया.
शाम 4:04 बजे इन्हें पूरी तरह से चार्ज कर लिया गया, जिसके बाद इस डबल सर्किट लाइन से इलाके को निर्बाध बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गयी. हालांकि, खबर लिखने तक कांके 33 केवीए पीएसएस 2:41 से ब्रेकडाउन था, जिससे इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित थी.
ट्रांसमिशन टावर गिरने से काके ग्रिड से जुड़े 33 केवी राजभवन, मोरहाबादी, कांके, सिरडो-1, सिरडो-2, और 33 केवी बोबरो विद्युत शक्ति उपकेंद्र को अब पहले की तरह ही निर्बाध बिजली मिलेगी. इन इलाकों में पिछले 16 दिनों से करीब आधी बिजली ही उपलब्ध हो पा रही थी. हटिया-1 ग्रिड से एक ओल्ड सर्किट से लोडशेडिंग कर बिजली देना ही संभव था. यह सर्किट काफी पुराना है, लिहाजा यहां से 75 की जगह महज 35 मेगावाट बिजली की आपूर्ति उपलब्ध करायी जा रही थी.
हटिया ग्रिड : शाम 5:00 बजे आपूर्ति : 110 मेगावाट
नामकुम ग्रिड : शाम 5:00 बजे आपूर्ति : 84 मेगावाट
कांके ग्रिड : शाम 5:00 बजे आपूर्ति : पहले 36 मेगावाट, अब 75 मेगावाट