अनुप जायसवाल, धुरकी : गढ़वा जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धुरकी प्रखंड के अम्बाखोरेया पंचायत के सुखलदरी जलप्रपात में पयटकों की भीड़ उमड़ने लगी है. यह स्थल गढ़वा जिले के खुबसूरत स्थानों में से एक है. वैसे यहां तो सालों भर लोग पहुंचते हैं, लेकिन पहली जनवरी एवं साल के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. यहां गढ़वा जिला ही नहीं, बल्कि झारखंड के अन्य जिले छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश व बिहार से भी पर्यटकों पहुंचते हैं. यह स्थान पूरे परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिये उपयुक्त है. इस स्थल की खासियत यह है कि कनहर नदी के दोनों किनारे पर हरे भरे जंगलों से यह घिरा हुआ है.
नदी के दूसरी तरह छतीसगढ़ तथा इस ओर झारखंड का धुरकी प्रखंड स्थित है. यहां कनहर नदी की जलधारा 100 फीट ऊंचे चट्टान से जब नीचे की ओर झरना का रूप लेकर गिरती है. तो उसे देखकर लोगों की निगाहें कुछ देर तक टिकी की टिकी रह जाती है. झरने से दूध की तरह फव्वारा व झाग बनते हैं और जब उस पर सूर्य की किरण पड़ती है तो सतरंगी नजारा उत्पन्न होता है. यह जलप्रपात पूरी तरह से प्रकृति संरचनाओं से रचा हुआ है. जलप्रपात के आसपास बैठने के लिये पार्कनुमा डिजाइन की कुर्सियों का निर्माण भी किया गया है. यहां ठहरने के लिये भी सुविधा युक्त रेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया है.
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यहां पहुंचाने के लिये परासपानी मोड़ से मुख्य पथ से पीसीसी सड़क का निर्माण किया गया है. कनहर नदी जलप्रपात को कर्पूरी ठाकुर पर्यटन स्थल के नाम से भी जाना जाता है.यहां 14 जनवरी मकर संक्रांति के अवसर पर भी बहुत भव्य मेला का आयोजन किया जाता है.जिसमे हजारों की संख्या में पड़ोसी राज्य यूपी एवं छत्तीसगढ़ से मेला मे लोग पहुंचते हैं. सुरक्षा की दृष्टिकोण से धुरकी पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गश्ती व निगरानी की जाती है.
यहां पर्यटकों को पहुंचने के लिये कई मार्ग हैं. गढ़वा जिला मुख्यालय से एनएच-75 स्थित श्रीबंशीधर नगर अनुमंडलीय मुख्यालय से सीधे मार्ग से निजी वाहन से भी यहां पहुंचा जा सकता है. गढ़वा जिला के मेराल के मार्ग से भी सीधे जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है. वहीं बंशीधर नगर रेलवे स्टेशन से किराये के रिजर्व वाहन से भी यहां पहुंचा जा सकता है.