कोतवाली चौक समीप जैन मंदिर व नाथनगर जैन सिद्धक्षेत्र में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन रविवार को उत्तम त्याग धर्म की आराधना विधि-विधान से हुई. कोतवाली चौक दिगंबर जैन मंदिर में पंडित मुकेश शास्त्री ने कहा कि कमजोरी दूर करें, नहीं तो आप कमजोर हो जायेंगे. सद्विचार ही अध्ययन की सार्थकता है. जरूरी काम मजबूरी से नहीं, खुशी से कीजिए, सफलता मिलेगी. छोटे लाभ को देखने वाले अक्सर बड़े लाभ से वंचित रह जाते हैं. त्याग असंतुलन को मिटाता है. समन्वय नीति से चलने वालों को कभी संकट नहीं आ सकता. इधर चंपापुर सिद्धक्षेत्र में समारोह के दौरान पंडित जागेश शास्त्री ने कहा कि यदि उद्देश्य अच्छा है तो कार्य भी अच्छा होगा. गलतफहमी कई बार कुछ नहीं होते हुए भी संबंध बिगाड़ देती है. लोक में जितने भी अनर्थ पैदा होते हैं, यह सभी कुसंग से होते हैं. त्याग के मार्ग पर चल कर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है. भोपाल के जितेंद्र ग्रुप ने भक्ति संगीत का आयोजन किया तो माहौला भक्तिमय बन गया. सुमित जैन ने कहा कि भावनाओं का त्याग ही सर्वोच्च त्याग है, जो आत्मा के वास्तविक स्वरूप पर चिंतन करने से ही संभव है.
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