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मुजफ्फरपुर में हर महीने 300 लोग हो रहे आवारा कुत्तों का शिकार, भगवान भरोसे जनता, निगम ने खड़ा किए हाथ

मुजफ्फरपुर में हर महीने 300 लोग आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं. पिछले आठ महीनों में 2530 लोगों को कुत्तों ने काटा है. औसत देखा जाए तो हर रोज कम से कम दस लोग इसके शिकार हो रहे हैं. मगर निगम ने इसे लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.

जिले में आवारा कुत्ते हर रोज 10 लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं. इस अनुपात में हर महीने लगभग तीन सौ लोगों को कुत्ते अपना शिकार बना रहे है. यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है. वर्ष 2022 के एक जनवरी से 27 अगस्त तक 25 सौ 30 लोगों को कुत्तों ने काटा है. यह तो वह आंकड़े हैं जो सदर अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग की सीएचसी-पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर पर इलाज कराने के लिए आए. ऐसे लोग भी काफी संख्या संख्या में हैं जो कुत्ते काटे जाने के बावजूद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए नहीं आते हैं. इन लोगों के आंकड़ों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो आंकड़े और भयावह हो सकते हैं. स्वास्थ्य विभाग के फार्मासिस्ट ने बताया कि हर दिन दस से बारह नये मरीज कुत्ते काटने के आ रहे हैं. इसे लेकर हर माह एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए दो हजार वॉयल की डिमांड की जाती है, लेकिन मिलती है सिर्फ 900 से 950 वॉयल. अब काफी संकट हो रहा है. स्वास्थ्य विभाग सदर अस्पताल व एसकेएमसीएच में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाता है. जबकि सीएचसी-पीएचसी, अर्बन हेल्थ सेंटर में वैक्सीन के अभाव में नहीं लगाया जाता हैं.

नगर निगम खड़ा कर चुका है हाथ

नगर निगम कुत्तों को पकड़ने के लिए हाथ खड़ा कर चुका है़ दूसरी तरफ सदर अस्पताल व एसकेएमसीएच में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए मारामारी रहती है. सदर अस्पताल में तो मरीजों को कई बार कुत्ते का पीछा करने की सलाह तक दे दी जाती है, उनसे कहा जाता है कि कुत्ता अगर मरता नहीं तो घबराने की जरूरत नहीं है.

शहर की जनता आगे आएं

राष्ट्रीय जनता दल अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव सह प्रदेश प्रवक्ता अब्दुल मजीद ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया है कि जिला व नगर निगम प्रशासन की ओर से मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. इस लापरवाही के कारण बच्ची को अपनी जान गंवानी पड़ी. उन्होंने अपील की है कि प्रशासन और नगर निगम ऐसी घटनाओं को अगर रोक नहीं सकता है, तो जनता को आगे आना होगा.

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