प्रभात खबर में छपी खबर का असर हुआ है. 30 जनवरी के अंक में प्रभात खबर ने नवजात को बेचने की खबर प्रकाशित की थी. खबर छपते ही 30 जनवरी को मंत्री चंपई सोरेन ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. इसके बाद मंत्री ने गुमला प्रशासन व पुलिस विभाग को को गुड़िया देवी की मदद करने व नवजात को बेचने के मामले में जांच का आदेश दिया था.
जिसके बाद गुमला उपायुक्त शिशिर कुमार सिन्हा ने एसडीओ गुमला रवि आनंद के नेतृत्व में टीम बना कर गुड़िया देवी के मामले की जांच करते हुए सरकारी योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया था. 30 जनवरी को एसडीओ ने गुड़िया देवी को आंबेडकर नगर से बरामद कर खड़िया पाड़ा के आश्रयगृह में रखे. इसके बाद गुड़िया देवी की टीबी बीमारी को देखते हुए उसे सदर अस्पताल गुमला में भर्ती कराया.
वहीं गुड़िया देवी के तीन साल की बेटी को सीडब्ल्यूसी के माध्यम से बालगृह में रखा गया. जहां अभी बच्ची की परवरिश हो रही है. वहीं बिहार के ईंट भट्ठा में फंसे दो भाई-बहनों को वहां से गुमला लाया गया. सीडब्ल्यूसी गुमला ने कागजी कार्रवाई कर दोनों बच्चों को सिमडेगा सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया.
वहीं पांच हजार रुपये में बेचे गये नवजात को बरामद करने के लिए एसडीओ ने पहल की. इसके बाद सीडब्ल्यूसी से समन्वय स्थापित कर दिल्ली में बेचे गये बच्चे को गुमला लाया गया. एसडीओ रवि आनंद ने बताया कि शुक्रवार को बच्चा का दिल्ली से लाया गया. सदर अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी शांति नगर गुमला के बालगृह को सौंप दिया गया है. जहां अभी बच्चे की देखभाल की जायेगी.