कभी देश के सबसे अमीरों में शुमार रहे रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया आज पैसे-पैसे के लिए मौहताज है. उसपर से बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जोरदार झटका दिया है. उनकी आत्मकथा ‘ऐन इनकंप्लीट लाइफ’ की बिक्री, प्रसार और वितरण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट के आगले आदेश तक कितान की छपाई और बिक्री पर रोक रहेगी.
क्यों कोर्ट ने दिया ये आदेश: बता दें, विजयपत सिंघानिया की पुस्ती की बिक्री, प्रसार और वितरण रोकने के पीछे कोर्ट का कहना है कि विजयपत सिंघानिया के बेटे गौतम सिंघानिया ने किताब को लेकर आपत्ति जताई है. गैरतलब है कि गौतम सिंहानिया का विजयपत सिंघानिया के साथ सालों से गहरा विवाद चल रहा है.
बाप-बेटे के रिश्ते काफी तल्ख: गौरतलब है कि विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे गौतम सिंघानिया दोनों के रिश्ते काफी तल्ख हैं. दोनों के बीत आपसी लड़ाई के साथ साथ कानूनी लड़ाई भी चल रही है. गौतम सिंघानियां ने किताब को लेकर ठाणे और मुंबई की अदालत में मुकदमा दायर कर रखा है.
वहीं, इस दिनों चर्चा है कि रेमंड ग्रुप के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया ने अपनी किताब कहा है कि, ‘मैने अनुभव से ये सबक सीखा है कि अपने जीवित रहते अपनी संपत्ति को बच्चों को देते समय सावधानी बरतनी चाहिए. आपकी संपत्ति आपके बच्चों को मिलनी चाहिए लेकिन ये आपकी मौत के बाद’.
गौरतलब है कि देश के सबसे बड़े उद्योगपति में शुमार विजयपत सिंघानिया कभी 10 हजार करोड रुपए की कंपनी रेमंड के मालिक हुआ करते थे. लेकिन आज सिंघानिया पाई-पाई के लिए मोहताज हैं. यहां तक की अपना आलीशान घर की बजाये वो मुंबई के एक किराये के मकान में रहते हैं.