पटना. सरकार ने सहकारिता विभाग और उससे जुड़ी विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचाने के लिए सदस्यता अभियान तेज कर दिया है. पैक्स की सदस्यता से वंचित परिवार के सदस्यों को सदस्यता दिलाने के लिए विभाग द्वारा ऑनलाइन व्यवस्था की है.
राज्य में 8463 पैक्स में 1.20 करोड़ सदस्य हैं. इनमें महिलाओं की संख्या लगभग 36 लाख है. विभागीय रिकाॅर्ड के मुताबिक साढ़े चार लाख नये सदस्य बनाये गये हैं. इसे जोड़ लिया जाये तो राज्य में पैक्स सदस्यों की कुल संख्या एक करोड़ 25 लाख के करीब पहुंच गयी है.
राज्य में पंचायत चुनाव होने के कारण भी इसका सदस्य बनने में लोग अधिक रुचि ले रहे हैं. धान की खरीद-बिक्री, उपकरणों पर सब्सिडी आदि किसान हित की कई योजनाओं का संचालन पैक्स के जरिये होता है. इसका लाभ सदस्य किसानों को मिलता है. ऐसे में पैक्स पंचायत चुनाव में ओपेनियन लीडर की भूमिका निभाते हैं.
ऐसे में लोग अधिक सक्रिय हैं. सदस्य संख्या बढ़ाने के साथ ही साथ पैक्स के कंप्यूटरीकरण का काम भी प्राथमिकता में शामिल है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा पैक्स का चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटरीकरण किया जाना है़ यह योजना तीन वित्तीय वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है. बिहार के 8463 पैक्स के कंप्यूटरीकरण पर होने वाले कुल खर्च का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार, 35 फीसदी राज्य और पांच फीसदी संबंधित समिति को वहन करना है.
पैक्स के कंप्यूटरीकरण के लिए राज्य सरकार ने एनआइसी को जिम्मेदारी दी है. एनआइसी ने ही सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया है. इस सॉफ्टवेयर में पैक्स के अभिलेख, आंकड़ों की एंट्री आदि अपलोड किया जा रहा है. अब तक राज्य के 6310 फैक्स के आंकड़ों को इस सॉफ्टवेयर में दर्ज किया जा चुका है. पैक्स के डिजिटाइजेशन पर वित्तीय वर्ष-2019-20 में 4580 पैक्स को प्रति पैक्स दस हजार रुपये की दर से राशि उपलब्ध करायी गयी थी.
विभागीय वेबसाइट www.cooperative.bih.nic.in के माध्यम से कोई भी व्यक्ति आॅनलाइन आवेदन कर पैक्स का सदस्य बन सकता है.
Posted by Ashish Jha