प्रद्युम्न की हत्‍या से सहमी किलकारियां, प्रसून जोशी ने शेयर की ये मार्मिक कविता…

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्‍कूल के 7 साल के बच्‍चे प्रद्युम्न की निर्मम हत्‍या कर दी गई जिसके बाद से पूरा देया सदमे हैं. लोग इस स्‍कूल का भारी विरोध कर रहे हैं. पूरे देश में बच्‍चों की सुरक्षा को लेकर खलबली मची हुई है. जाने-माने गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्‍यक्ष प्रसून जोशी ने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 12, 2017 1:28 PM

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्‍कूल के 7 साल के बच्‍चे प्रद्युम्न की निर्मम हत्‍या कर दी गई जिसके बाद से पूरा देया सदमे हैं. लोग इस स्‍कूल का भारी विरोध कर रहे हैं. पूरे देश में बच्‍चों की सुरक्षा को लेकर खलबली मची हुई है. जाने-माने गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्‍यक्ष प्रसून जोशी ने सोशल मीडिया पर बचपन को लेकर एक मार्मिक कविता शेयर की है. प्रसून जोशी की ये कविता सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. प्रद्युम्न की मौत के बाद उनके परिजनों के साथ-साथ पूरा देश आहत है.

प्रसून जोशी ने लिखा,’ जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे, जब माँ की कोख से झाँकती ज़िन्दगी, बाहर आने से घबराने लगे, समझो कुछ ग़लत है. जब तलवारें फूलों पर ज़ोर आज़माने लगें, जब मासूम आँखों में ख़ौफ़ नज़र आने लगे, समझो कुछ ग़लत है. जब ओस की बूँदों को हथेलियों पे नहीं, हथियारों की नोंक पर थमना हो, जब नन्हें-नन्हें तलुवों को आग से गुज़रना हो, समझो कुछ ग़लत है. जब किलकारियाँ सहम जायें जब तोतली बोलियाँ ख़ामोश हो जाएँ, समझो कुछ ग़लत है.

‘कुछ नहीं बहुत कुछ ग़लत है क्योंकि ज़ोर से बारिश होनी चाहिये थी पूरी दुनिया में हर जगह टपकने चाहिये थे आँसू रोना चाहिये था ऊपरवाले को आसमान से फूट-फूट कर शर्म से झुकनी चाहिये थीं इंसानी सभ्यता की गर्दनें शोक नहीं सोच का वक़्त है मातम नहीं सवालों का वक़्त है. अगर इसके बाद भी सर उठा कर खड़ा हो सकता है इंसान तो समझो कुछ ग़लत है.’

गौरतलब है कि गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्‍कूल में दूसरी कक्षा के 7 वर्षीय छात्र प्रद्युम्न ठाकुर को बीते शुक्रवार को स्‍कूल परिसर में चाकू से गला रेतकर हत्‍या कर दी गई थी. उसका शव स्‍कूल के वॉशरूम में बरामद हुआ था. इस खबर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है.