Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है रणवीर-आलिया की ''गली ब्‍वॉय'', video

उर्मिला कोरी फ़िल्म: गली ब्‍वॉय निर्माता: एक्सेल एंटरटेनमेंट निर्देशक: ज़ोया अख्तर कलाकार : रणवीर सिंह,आलिया भट्ट, विजय राज,सिद्धार्थ रेटिंग: साढ़े तीन हालात और सपनों के बीच जब बहुत बड़ी खाई हो तो सपने नहीं बल्कि हालात को बदलने की कोशिश करनी चाहिए. फ़िल्म का यह संवाद ‘गली ब्‍वॉय’ की कहानी को बयां करता है. फ़िल्म […]

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उर्मिला कोरी

फ़िल्म: गली ब्‍वॉय

निर्माता: एक्सेल एंटरटेनमेंट

निर्देशक: ज़ोया अख्तर

कलाकार : रणवीर सिंह,आलिया भट्ट, विजय राज,सिद्धार्थ

रेटिंग: साढ़े तीन

हालात और सपनों के बीच जब बहुत बड़ी खाई हो तो सपने नहीं बल्कि हालात को बदलने की कोशिश करनी चाहिए. फ़िल्म का यह संवाद ‘गली ब्‍वॉय’ की कहानी को बयां करता है. फ़िल्म की कहानी की बात करें तो यह मुराद (रणवीर सिंह) की कहानी है जो धारावी की झोपड़पट्टी में पला बढ़ा है. उसके पिता से उसकी बनती नहीं है. पिता ने दूसरा निकाह कर लिया है. अपने घर और आसपास के हालात उसे परेशान करते हैं. वह कुछ करना चाहता है लेकिन क्या उसे भी पता नहीं है. अपने गुस्से को गीतों की शक्ल में अपनी कॉपी में लिखता है.

इसी बीच उसकी मुलाकात एक रैपर एम सी शेर से होती है. मुराद उसका प्रसंशक है. शेर उसे कहता है कि दुनिया में अगर सबकुछ कंफर्टेबल होता तो रैप कौन करता था. मुराद को समझ आ जाता है कि उसे क्या करना है.

इसके बाद शुरू होती है जद्दोजहद, मुराद के रैपर बनने का सफर, लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है. रोटी और छत की जुगाड़ में कब सपने पीछे छूट जाते हैं यह मालूम भी नहीं पड़ता है. क्या मुराद अपने सपनों को पूरा कर पाएगा. यही फ़िल्म की आगे की कहानी है. फ़िल्म आम मुम्बइया मसाला फिल्मों से अलग है लेकिन फ़िल्म आपको पूरी तरह से बांधे रखती है और फ़िल्म के हर पल को आप एन्जॉय करते हैं.

खामी की बात करें तो फ़िल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी है और फ़िल्म थोड़ी छोटी होनी चाहिए थी.

अभिनय पर आए तो फ़िल्म रणवीर सिंह ने मुराद की भूमिका में पूरी तरह से रच बस गए हैं. रणवीर ने अपने सिंगिंग टैलेंट को भी इस फ़िल्म में साबित कर दिया है. एम सी शेर के किरदार में सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने बहुत ही उम्दा काम किया है. आलिया ने खिसकेली मतलब जुनूनी लड़की की भूमिका को बखूबी अदा किया है. आलिया और रणवीर की केमिस्ट्री भी खास है. विजय राज अपनी भूमिका में जमे हैं तो कल्कि कोचलिन के लिए फ़िल्म में करने को कुछ खास नहीं था.

फ़िल्म के गीत संगीत की बेस्ट करें तो वो पहले ही हिट हो चुका है. गाने बेहतरीन लिखे गए हैं. रैप जॉनर भले ही सभी को कनेक्ट नहीं करता है लेकिन इस फ़िल्म के सभी रैप अपने उम्दा लेखनी की वजह से बेहतरीन बन गए हैं. संवाद भी फ़िल्म को और बेहतरीन बनाते हैं. फ़िल्म का सिनेमेटोग्राफी भी उम्दा है कुलमिलाकर गली बॉय मनोरंजन के साथ साथ मैसेज भी देती है अपने सपनों को पूरा करने की.

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