खास बातचीत: क्या आप अंधविश्वासी भी हैं ? जानें इस सवाल का सोनम ने क्या दिया जवाब

अभिनेत्री सोनम कपूर इन दिनों अपनी फिल्म ‘द जोया फैक्टर’ के प्रोमोशन में बिजी हैं. यह फिल्म अनुजा चौहान के नॉवेल द जोया फैक्टर पर आधारित है, लेकिन सोनम कहती हैं कि किताब और फिल्म में काफी अंतर होता है. किताब से ढाई घंटे की फिल्म बनाना आसान नहीं होता है. अच्छी बात यह है […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

अभिनेत्री सोनम कपूर इन दिनों अपनी फिल्म ‘द जोया फैक्टर’ के प्रोमोशन में बिजी हैं. यह फिल्म अनुजा चौहान के नॉवेल द जोया फैक्टर पर आधारित है, लेकिन सोनम कहती हैं कि किताब और फिल्म में काफी अंतर होता है. किताब से ढाई घंटे की फिल्म बनाना आसान नहीं होता है. अच्छी बात यह है कि स्क्रिप्ट में जो भी बदलाव हुए उनमें किताब की लेखिका अनुजा भी शामिल थी. हम कुछ भी उनकी जानकारी के बिना बदलाव नहीं चाहते थे. पेश है बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर से उर्मिला कोरी की हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

-किस्मत पर आप कितना यकीन करती हैं?
मैं मानती हूं कि मौके किस्मत से ही मिलते हैं लेकिन उसके बाद आपकी मेहनत ही होगी जो उस मौके को आप अच्छे से भुना पायेंगी या खुद को साबित कर पायेंगी.

-आपकी निजी जिंदगी में लक ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है?
मैं अनिल कपूर के घर में पैदा हुई तो ये मेरी किस्मत है. मैं फिल्मों में आना चाहती थी जबकि मेरे पिता चाहते थे कि मैं विदेश पढ़ाई के लिए जाऊं. मैं अपनी पहचान छिपाकर भंसाली सर से मिलने गयी थी कि मैं अनिल कपूर की बेटी हूं. रणबीर कपूर मेरे दोस्त थे और वह वहां अस्सिटेंट का काम कर रहे थे. मैं उसी काम को पाने के लिए गयी थी क्योंकि मैं डायरेक्टर बनना चाहती थी. मैं उनके घर पर बैठकर उनका इंतजार कर रही थी. भंसाली सर जब आये तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें एक्टिंग करते हुए देखना चाहता हूं तो वो भी मेरी किस्मत थी लेकिन उसके बाद ‘सांवरिया’ का हिस्सा बनने के लिए मुझे बहुत बार ऑडिशन प्रोसेस से गुजरना पड़ा. ‘दिल्ली 6’ भी मैंने ऑडिशन के जरिये ही पाया था मतलब कड़ी मेहनत वहां भी मैंने की थी.

-आप किसी के लिए निजी जिंदगी में भी लकी रहीं हैं?
मेरे पिता ये मानते हैं कि मैं उनके लिए लकी हूं. मेरे जन्म के वक्त ही ‘मशाल’ उनको मिली थी. जन्मपत्री आप मानते हैं तो उस के अनुसार भी मैं अपने पिता के लिए लकी हूं. सोनम नाम का मतलब ही है लक.

-पिता अनिल कपूर की किस फिल्म का रीमेक करना चाहेंगी?
मैं मिस्टर इंडिया का रीमेक करना चाहूंगी. वो भी टाइटल रोल. डैड और बोनी कपूर अंकल के पास इसके राइट्स हैं वे अगर दे देंगे तो जरूर करूंगी. 33 साल हो गये उस फिल्म को रीमेक बनना चाहिए. फिल्म में सभी ने बहुत अच्छा काम किया था. एक मासूमियत थी मिस्टर इंडिया के किरदार में जो खास था.

-शादी के बाद क्या माता-पिता को लेकर आपकी केयर और बढ़ गयी है?
हां. मैं उन्हें बहुत मिस करती हूं जब मैं लंदन में होती हूं. यहां आती भी हूं तो काम के सिलसिले में तो ज्यादा समय नहीं दे पाती हूं. फोन और वीडियो के जरिए टच में रहती हूं.

-भगवान को मानती हैं आप ?
हां मानती हूं. सभी को मानती हूं. भगवान शिव से थोड़ा ज्यादा कनेक्शन महसूस होता है. भगवान ने मुझे सबकुछ दिया है. किसी चीज की कोई कमी नहीं है. भगवान का शुक्रिया तो बनता है.

-आप और आनंद लांग डिस्टेंस रिलेशनशिप कप्पल भी हैं,आप लांग डिस्टेंस कप्पल्स को क्या सलाह देंगी?
फेस टाइम, स्काइप के जरिए एक दूसरे से जुड़े रहिये. दिन भर में कम से कम एक बार खाना साथ में खाइए भले ही स्काइप के जरिए से ही सही. उसमें बस आप दोनों ही हो और दो हफ्ते से ज्यादा दूर मत रहिए. आजकल ट्रेवलिंग आसान हो गयी है. पहले तो दो दो महीने हो जाते थे, लेकिन अब मैं टाइम को किसी तरह मैनेज करके दो हफ्तों में आनंद से मिलने लंदन पहुंच ही जाती हूं.

-लंदन और भारत में आप क्या फर्क पाती हैं
वहां सारा काम खुद करना पड़ता है. कुकिंग मुझे पसंद है लेकिन वॉशिंग नहीं पसंद है. डिश वॉशर है तो बच जाती हूं. आप वहां सुबह और शाम वॉकिंग कर सकते हैं जो मुंबई में नहीं कर सकती. मुंबई में तो जगह ही नहीं है. इतने लोग हैं. इतना कंस्ट्रक्शन चल रहा है. सब जगह धूल मिट्टी है, लेकिन हां घर मुम्बई में है परिवार भी तो आना ही पड़ता है.

-क्या आप अंधविश्वासी भी हैं?
हां, मैं भारतीय हूं ये सब तो हमारे अंदर सिस्टम में होता है. कहीं यात्रा करने जाते हैं तो भगवान का नाम लेते हैं. गायत्री मंत्र पढ़ती हूं. मां बोलती है ज्यादा नहीं बोलने का ये अच्छा वो अच्छा है. वरना नजर लग जाती है.

-इस फिल्म में आपके साथ दलकीर सलमान हैं ,उनके साथ अनुभव कैसा रहा
दलकीर बहुत ही क्लासी इंसान है. शांत है तमीजवाला है. बहुत ही अच्छा व्यवहार है. मैं बहुत ही मुंह फट हूं वो नहीं. आनंद की तरह दलकीर भी है. दोनों की राशि सिंह है. मैं आनंद को गौतम बुद्ध बुलाती हूं. वो बहुत शांत है. मैं उसके अपोजिट हूं. मेरी बहन कहती हैं कि मुझे सिर्फ आनंद ही हैंडल कर सकता है.

-क्या आपको लगता है कि फिल्म वर्ल्ड कप के वक्त आती तो ज्यादा अच्छा होता?
फिल्म के सीजी में वक्त चला गया. क्रिकेट स्टेडियम वो सब दिखाना आसान नहीं था. उस वक्त कई बड़ी फिल्में भी रिलीज हो रही थी. हमारी फिल्म छोटी है तो थोड़ा उसको वक्त चाहिए थी. फिल्म का चेहरा मैं हूं एक औरत तो ये आज भी आसान नहीं है. दिल्ली बहुत दूर है यार. थोड़ी-थोड़ी ही प्रोग्रेस हुई है.

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