Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है ''मलंग''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म : मलंग निर्देशक : मोहित सूरी कलाकार : आदित्य रॉय कपूर,दिशा पटानी,अनिल कपूर,कुणाल खेमू,वत्सल सेठ,कीथ और अन्य रेटिंग : दो मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली ने कहा है कि हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,जिसको भी देखना हो कई बार देखना. मोहित सूरी की ‘मलंग’ निदा फ़ाज़ली की इन्ही […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म : मलंग

निर्देशक : मोहित सूरी

कलाकार : आदित्य रॉय कपूर,दिशा पटानी,अनिल कपूर,कुणाल खेमू,वत्सल सेठ,कीथ और अन्य

रेटिंग : दो

मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली ने कहा है कि हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,जिसको भी देखना हो कई बार देखना. मोहित सूरी की ‘मलंग’ निदा फ़ाज़ली की इन्ही पंक्तियों को जीती है. इस फ़िल्म का हर किरदार स्याह है. हर किरदार में दस रंग है. फ़िल्म का कांसेप्ट अच्छा है लेकिन पर्दे पर जो कहानी और ट्रीटमेंट नज़र आता है वो निराश करता है.

फ़िल्म की कहानी अद्वेत ठाकुर ( आदित्य रॉय कपूर) और सारा (दिशा पाटनी) की है. फ़िल्म में दो कहानियां साथ साथ चलती हैं एक मौजूदा समय की तो दूसरी पांच साल पहले की. गोवा कहानी का एक अहम किरदार हैं. जहां पर आदित्य और सारा मिलते हैं.

अचानक से हुई मुलाकात फ़िल्म के मध्यांतर तक पहुंचते-पहुंचते एक दूसरे के लिए जीने मरने और मारने तक पहुँच जाती है. ये पांच साल पहले की कहानी है. मौजूदा समय में अद्वेत एक के बाद एक पुलिस वाले की हत्या कर रहा है. सनकी पुलिस अफसर अगाशे (अनिल कपूर) को वह हर हत्या के पहले जानकारी दे देता है. क्यों वह पुलिस के अफसरों को मार रहा है ? अगाशे को वह सब क्यों बता रहा है? क्या वर्तमान की ये कहानी अतीत से जुड़ी है ? कैसे जुड़ी है ? यही फ़िल्म का ट्विस्ट एंड टर्न हैं.

इस कहानी के सभी किरदार स्याह हैं और इन सबकी अलग अलग कहानियां हैं जो सब्प्लॉट्स के साथ आपस में चलती हैं. फ़िल्म का फर्स्ट हाफ गोवा को वही ड्रग्स, शराब और धुंए के नशे में दर्शाने में गया है और अद्वेत और सारा की प्रेमकहानी को मजबूत करने में हालांकि ये पहलू फ़िल्म को कमज़ोर कर जाता है.

सेकंड हाफ में कहानी तेज़ी से भागती है लेकिन परदे पर जो कुछ भी दिखता है वो हकीकत से परे लगता है. फ़िल्म की कहानी प्रेडिक्टेबल है. फ़िल्म कई पुरानी फिल्मों की याद भी दिलाती है. मोहित सूरी की ही ‘एक विलेन’ और मर्डर 2 की यह फ़िल्म याद दिलाती है.

अभिनय की बात करें तो आदित्य रॉय कपूर ने अच्छी बॉडी फ़िल्म के लिए बनायी है. कई दृश्यों में उन्होंने अच्छी एक्टिंग की है तो कई जगह वह चुके भी हैं. दिशा हमेशा की तरह पर्दे पर आकर्षक नज़र आई हैं. उन्हें अभी भी एक्टिंग पर बहुत काम करने की ज़रूरत है. कुणाल खेमू को फ़िल्म में अच्छा रोल मिला है जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है. अनिल कपूर अपने सनकी पुलिस अफसर के किरदार में एक बार फिर दिल जीत ले जाते हैं. बाकी के किरदारों का काम ठीक ठाक है.

फ़िल्म के संवाद रोचक हैं तो वहीं म्यूजिक और सिनेमेटोग्राफी अच्छे बन पड़े हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >