रवीन्द्र जैन : ''अंखियों के झरोखों से...'' उतर गये श्रोताओं के दिलों में

पवन कुमार पांडेय प्रख्यात गीतकार और संगीतकार रवीन्द्र जैन नहीं रहे. मुंबई के लीलावती अस्पताल में उनका निधन हो गया. अपने सुरीले संगीत से दशकों तक लोगों का मनोरंजन करने वाले रवीन्द्र जैन की गिनती हिन्दी सिनेमा जगत के बेहद प्रतिभाशाली संगीतकारों में होती है.लगभग तीन-चार दशकों तक भारतीय कला जगत में अपना योगदान देने […]

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पवन कुमार पांडेय

प्रख्यात गीतकार और संगीतकार रवीन्द्र जैन नहीं रहे. मुंबई के लीलावती अस्पताल में उनका निधन हो गया. अपने सुरीले संगीत से दशकों तक लोगों का मनोरंजन करने वाले रवीन्द्र जैन की गिनती हिन्दी सिनेमा जगत के बेहद प्रतिभाशाली संगीतकारों में होती है.लगभग तीन-चार दशकों तक भारतीय कला जगत में अपना योगदान देने वाले रवीन्द्र जैन ने कई सुपरहिट फिल्मों में म्यूजिक दिया. इन फिल्मों में ‘गीत गाता चल’, ‘चितचोर’, ‘अंखियों के झरोखे’, ‘हिना’जैसी फिल्म शामिल है.

संगीत के इस महानायक का जन्म बिना आंखों की रोशनी के साथ हुई .लेकिन इनके कला में कभी यह विकलांगता बाधा नहीं बन पायी. उनके दिये गये संगीत को लोगों ने रूह से महसूस किया. अलीगढ़ में जन्में रवीन्द्र जैन के पिता संस्कृत के विद्वान और आर्युवेदाचार्य थे.बचपन के दिनों से उनका झुकाव संगीत के तरफ था.
स्कूल के दिनों में वो कविता और भजन गाया करते थे. अपने शुरुआती दिनों से भजन का ये लगाव आगे के उनके करियर में भी दिखा. उनके गाये जितने रोमांटिक गाने फेमस हुए उतनी ही कामयाबी उन्हें धार्मिक गानों में भी मिली. धार्मिक सिरियल श्रीकृष्णा में न उन्होंने सिर्फ संगीत दिया ,बल्कि कई बैकग्राउंड गाने भी गाये.
राजकपूर की फिल्म ‘रामतेरीगंगा मैली ‘ में भी उन्होंने संगीत दिया. लेकिन उन्हे सबसे ज्यादा कामयाबी अंखियों के झरोखे सें गाने से मिली. इस गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज भी यह लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है. राजकपूर के साथ इन्होंने राम तेरी गंगा मैली, हिना फिल्मों में काम किया. बाद में वो राजश्री प्रोडेक्शन के फिल्मों के म्यूजिक के पर्याय बन गये.
‘नदिया के पार’, ‘विवाह’ , ‘गीत गाता चल’ , ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाये’ फिल्म में भी इन्होंने संगीत दिया था. इनकी आखिरी सुपरहिट फिल्म ‘विवाह’ थी. संगीत में उन्हें उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.
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