सम्पत ने कहा,माधुरी के अभिनय से ऐसा लगता है जैसे पर्दे पर मैं ही हूं

नयी दिल्ली:जागरुक कार्यकर्ता सम्पत पाल फिल्म ‘‘गुलाब गैंग’’ के निर्माताओं से जरुर क्रोधित हो सकती हैं लेकिन माधुरी दीक्षित के चरित्र से वे खुद को जुड़ा हुआ पाती हैं. उन्हें माधुरी के चरित्र में खुद की छवि नजर आती है. सम्पत के अनुसार, यह बिल्कुल ऐसा है जैसे ‘‘पर्दे पर मैं ही हूं.’’ जागरुक समूह […]

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नयी दिल्ली:जागरुक कार्यकर्ता सम्पत पाल फिल्म ‘‘गुलाब गैंग’’ के निर्माताओं से जरुर क्रोधित हो सकती हैं लेकिन माधुरी दीक्षित के चरित्र से वे खुद को जुड़ा हुआ पाती हैं. उन्हें माधुरी के चरित्र में खुद की छवि नजर आती है. सम्पत के अनुसार, यह बिल्कुल ऐसा है जैसे ‘‘पर्दे पर मैं ही हूं.’’ जागरुक समूह ‘गुलाब गैंग’ की संस्थापक पाल ने प्रेट्र के साथ बातचीत में कहा, ‘‘फिल्म को लेकर मेरी लड़ाई अब भी जारी है. जब तक मेरी मांग नहीं मान ली जाती तब तक मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगी. हालांकि माधुरी ने निश्चित ही अपनी अभिनय क्षमता से मुझे प्रभावित किया है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपने जीवन के जिस दौर से मैं गुजर चुकी हूं माधुरी के अभिनय ने वो यादें ताजा कर दीं.’’ उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेत्रियों को लेकर उनका कोई विरोध नहीं है, उनका विरोध अभिनव सिन्हा सहित फिल्म के निर्माताओं से है. फिल्म की रिलीज रोकने के लिए पाल ने अदालत का रुख किया था. उन्होंने दावा किया था कि फिल्म बनाने से पहले उनकी मंजूरी नहीं ली गई थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह मानहानि का मामला है जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है.

बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने देशभर में फिल्म को रिलीज करने की अनुमति दी थी लेकिन न्यायालय ने यह निर्देश दिया था कि फिल्म दिखाने से पहले यह खंडन संदेश प्रसारित किया जाए कि फिल्म की कहानी का पाल के जीवन या उनके संगठन से कोई संबंध नहीं है. पाल ने शुक्रवार को अपने वकील के साथ फिल्म देखी और कहा कि फिल्म में जो कुछ भी दिखाया गया है वह उनके जीवन से काफी मिलती है. आमना फॉन्टेला खान ने ‘पिंक सारी रिवॉल्यूशन’ नाम की अपनी किताब में पाल के जीवन के बारे में लिखा है.

उन्होंने कहा, ‘‘केवल खंडन संदेश चला देने से ही वास्तविकता नहीं बदलेगी. मैं यहां सही हूं. आमना फॉन्टेला खान ने अपनी किताब ‘पिंक सारी रिवॉल्यूशन’ में जो कहानी लिखी है फिल्म की कहानी ठीक उसी के जैसी है. आप कैसे माधुरी के किरदार ‘‘रज्जो’’ को काल्पनिक कह सकते हैं.’’ पाल ने कहा, ‘‘मैंने किस तरह से महिला हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़ी, बुंदेलखंड के आस पास के इलाकों में बिजली आपूर्ति के लिए मैंने किस तरह से मुख्यमंत्री से संपर्क किया, कैसे मैं जेल गई, कैसे मुङो वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चित्रकूट जिले के माणिकपुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट मिली, फिल्म में यही सारी बातें दिखाई गई हैं.’’

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