देहरादून : आगामी मंगलवार से शुरू होने वाले कांवड़ मेला में आने वाले कांवड़ियों का पहली बार पंजीकरण कर उनका संपूर्ण ब्यौरा रखा जायेगा. एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, गढ़वाल के आयुक्त सुबर्धन की अध्यक्षता में आज हरिद्वार में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की अन्तर्जनपदीय और अन्तर्राज्यीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि पहली बार कांवड़ यात्रा के प्रारंभिक स्थल पर कांवड़ यात्रियों का संबंधित प्रशासन द्वारा पंजीकरण, नाम, पता तथा मोबाइल नम्बर का ब्यौरा रखा जाये और संबंधित सूचनायें जिलाधिकारी हरिद्वार को उपलब्ध करायी जाए.
इस बैठक में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के भी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि किसी कांवड़ यात्री का पंजीकरण नहीं हुआ है तो उनका हरिद्वार में बनाये गये पांच स्थानों– चिड़ियापुर, सांतरशाह, धनौरी, जगजीतपुर तथा रेलवे स्टेशन पर पंजीकरण कराया जाए.
कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह भी निश्चित किया गया कि डीजे, हाकी डंडा, त्रिशूल, लाठी आदि कांवड़ यात्रा में पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद आयुक्त शिवशंकर सिंह ने बताया कि यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिये उत्तराखंड सरकार के साथ आपसी तालमेल से कार्य किया जायेगा. गढ़वाल के पुलिस उप महानिरीक्षक अमित सिन्हा ने बताया कि कांवड़ यात्रा के लिये विभिन्न जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल के अलावा 14 कंपनी पीएसी और दो कंपनी आरएएफ की व्यवस्था की गयी है.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा आरएएफ की आठ और कंपनियों की भी मांग की गयी है. प्रतिवर्ष सावन के महीने में लाखों की संख्या में कांवड़िये गंगा जल लेने के लिये हरिद्वार और ऋषिकेश आते हैं जिसे वे शिवरात्रि के दिन अपने गांव या घर में स्थित शिवमंदिर में अर्पित करते हैं.