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Coronavirus: किडनी और फेफड़े को चोट पहुंचा रहा है कोरोनावायरस, नयी स्टडी में मिली ये बड़ी जानकारियां

Coronavirus द लैंसेट माइक्रोब में कोरोनावायरस पर एक स्टडी प्रकाशित की गयी. कोरोनावायरस के इस स्टडी में पता चला है कि वायरस के कारण मरने वाले मरीजों में फेफड़ों और किडनियों पर चोट के निशान थे.

Coronaviurs : कोरोना वायरस ने भारत समेत दुनियाभर को अपने चपेट में ले लिया है. भारत समेत दुनिया के तमाम देश इस संकट से जूझ रहे हैं. कोरना वायरस दुनियाभर में 2 करोड़ से अधिक वहीं भारत में 30 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है. यह वायरस नया है और इसको लेकर लगातार नई बातें सामने आ रही हैं. हाल ही में एक नये अध्ययन से पता चला है कि यह वायरस इंसान के किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों में खून के थक्के भी जमा देता है.

बता दें कि हाल ही में द लैंसेट माइक्रोब में कोरोनावायरस पर एक स्टडी प्रकाशित की गयी. कोरोनावायरस के इस स्टडी में पता चला है कि वायरस के कारण मरने वाले मरीजों में फेफड़ों और किडनियों पर चोट के निशान थे. द लांसेट माइक्रोब में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व इंपीरियल कॉलेज लंदन और इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट के शोधकर्ताओं ने किया. इस स्टडी में 10 मरीजों पर एग्जामिनेशन किए गए थे यद्यपि स्टडी में जांच किए गए मरीजों की संख्या कम थी, लेकिन इसे इंग्लैंड में अब तक कोविड 19 मरीजों के हुए पोस्टमार्टम एग्जामिनेशन की सबसे बड़ी स्टडी कहा जा रहा है.

स्टडी में मिली ये बड़ी जानकारियां

सभी मरीजों का था डिफ्यूज एल्वियोलर डैमेज (DAD). DAD फेफड़ों की चोट के एक पैटर्न का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला एक शब्द है जिसे वायरल संक्रमण के परिणामस्वरूप देखा जा सकता है. फेफड़ों की इस तरह की चोट से गैस एक्सचेंज (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड) और फेफड़ों में रक्त के बहाव को प्रभावित कर सकती है.

थ्रोम्बोसिस: 10 में 9 मरीज की पूरी तरह जांच करने पर पता चला की उनके किसी एक बड़े अंग पर खून के थक्के बने हुए हैं। थ्रोम्बोसिस सर्कुलेट्री सिस्टम माध्यम से सामान्य रूप से बहने से रोकती है और स्ट्रोक और दिल के दौरे का कारण बन सकती है. शोधकर्ताओं को 8 मरीजों को फेफड़ों, 5 मरीजों के दिल और 4 मरीजों की किडनी पर थ्रोम्बी मिला.

सभी मरीजों में रेनल ट्यूब्युलर चोट के सबूत मिले थें , यह किडनी की चोट होती है. किडनी फेल या डैमेज का कारण बन सकती है. इसका मुख्य कारण किडनी में कम रक्त प्रवाह और गंभीर संक्रमण हैं. यह अक्सर उन रोगियों को प्रभावित करता है जो अस्पताल और आईसीयू में भर्ती में हैं

शोधकर्ताओं ने एक रोगी में एक दुर्लभ फंगल संक्रमण के सबूत भी पाए, जिसे म्यूकोर्मोसिस कहा जाता है. Mucormycosis एक संक्रमण है जो शरीर के दूसरे हिस्से को प्रभावित करने के लिए रक्तप्रवाह के माध्यम से फैल सकता है. गंभीर संक्रमण में फेफड़े, मस्तिष्क और गुर्दे, तिल्ली और हृदय सहित अन्य अंग शामिल हो सकते हैं.

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Prabhat Khabar Digital Desk
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