पश्चिम से अच्छी चीजें ही सीखें
आधुनिकता का प्रगतिशीलता का मतलब पहले के बने ढांचे को नेस्तनाबूद कर देना नहीं होता है. लिव-इन रिलेशन, समलैंगिकता और वेश्यावृत्ति जैसी कुछ कुप्रवृत्तियों को कानूनसम्मत बनाने का प्रयास हमारे देश में भी चल रहा है. कुछ लोगों का विचार है कि इन गतिविधियों को वैधता मिलनी चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों को अपना जीवन जीने […]
आधुनिकता का प्रगतिशीलता का मतलब पहले के बने ढांचे को नेस्तनाबूद कर देना नहीं होता है. लिव-इन रिलेशन, समलैंगिकता और वेश्यावृत्ति जैसी कुछ कुप्रवृत्तियों को कानूनसम्मत बनाने का प्रयास हमारे देश में भी चल रहा है. कुछ लोगों का विचार है कि इन गतिविधियों को वैधता मिलनी चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों को अपना जीवन जीने का अधिकार है.
कुछ का यह भी मानना है कि ऐसे लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है, क्योंकि वो वैसे ही होते हैं. क्या ऐसे लोगों की सबसे बड़ी समस्या उनका वैसा होना ही है? मानवाधिकार भारत के लिए नया विषय नहीं है. लेकिन, ध्यान रहे कि जिस समाज में भी ऐसी गतिविधियों को वैध बनाया गया है, वहां के पारिवारिक-सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ा है. भोगवादी प्रवृत्ति बढ़ी है और मनुष्य अकेला हुआ है. बेहतर है कि हम पश्चिम की अच्छी बातों का ही अनुसरण करें.
विनय भट्ट, हजारीबाग