17 साल की उम्र में अमन साव ने थामी थी बंदूक और जेल से चलाया साम्राज्य, सोशल मीडिया पर डालता था हत्या का वीडियो

Aman Saw Gangster : बर्नपुर के सीमेंट फैक्टरी में फायरिंग करने से लॉरेंस बिश्नोई गैंग तक झारखंड के गैंगस्टर अमन साव का आतंक झारखंड में लगातार बढ़ता ही जा रहा था. 8 मार्च को जब हजारीबाग में एनटीपीसी के डीजीएम कुमार गौरव की हत्या की गई, तो शक की सुई अमन साव की ओर ही घूमी. लेकिन 11 मार्च को आतंक का दूसरा नाम अमन साव की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई.

By Rajneesh Anand | March 11, 2025 4:46 PM
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Aman Saw Gangster :  अमन साव ने मात्र 17 साल की उम्र में अपना नाम अपराध की किताब में लिखवा लिया था. उसके बाद उसपर 50 से अधिक केस दर्ज हुए और वह जेल में रहने के बाद भी वहीं से अपना साम्राज्य चला रहा था.

अमन साव या अमन साहू कुछ भी कह लें आतंक के इस पर्याय का अंत हो गया. अमन साव पुलिस एनकाउंटर में मारा गया है. 11 मार्च को उसे रायपुर से रांची लाया जा रहा था, उसी दौरान पुलिस की गाड़ी पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इस मौके का फायदा उठाकर अमन साव ने पुलिस का हथियार छीना और भागने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने फायरिंग की और गैंगस्टर अमन साव मारा गया. 

क्रूर अपराधी था अमन साव

गैंगस्टर अमन साव कितना क्रूर था इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने जो हत्या की या करवाई उसका तरीका बहुत ही बर्बर होता था. 8 मार्च 2025 को हजारीबाग में एनटीपीसी के डीजीएम कुमार गौरव की हत्या मामले में भी उसका हाथ होने की आशंका जताई जा रही थी,जिनकी हत्या बेरहमी से सुबह आॅफिस जाते वक्त कर दी गई थी. अमन साव बड़े कोयला कारोबारियों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों से रंगदारी वसूलता था. रंगदारी नहीं मिलने पर वह संबंधित लोगों की हत्या करवाने में जरा भी संकोच नहीं करता था. अपने प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के लोगों की हत्या करवाने में भी उसे जरा भी संकोच नहीं होता था. वह अपने विरोधियों को सबक सिखाने के उद्देश्य से उनकी हत्या करवाने का तरीका बहुत ही क्रूर तलाशता था. 

अमन साव अपना खौफ बनाए रखना चाहता था

अमन साव ना सिर्फ अपने कारनामों से अपना खौफ बनाए रखना चाहता था, बल्कि वह सोशल मीडिया को भी अपने खौफ के प्रचार का माध्यम बनता था. उसने प्रशासन को चुनौती देते हुए हत्या के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए साथ ही हथियारों का भी वीडियो वह अपलोड करता था. वह यह बताना चाहता था कि पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकती हैं और वह परम स्वतंत्र है. 

कैसा था अमन साव का क्राइम पैटर्न

अमन साव

अमन साव जेल में रहे या जेल के बाहर उसका आतंक कायम था. वह व्हाट्‌सएप और टेलीग्राम के जरिए कारोबारियों को मैसेज करवाता था. फोन काॅल का इस्तेमाल भी किया जाता था, लेकिन लोकेशन पता ना चले इसके लिए वह व्हाट्‌सएप और टेलीग्राम का उपयोग करता था. मैसेज में रंगदारी की मोटी रकम मांगी जाती थी, अगर रकम मिल गई तो ठीक नहीं वरना क्रूरता के साथ उस व्यक्ति की हत्या करना अमन साव का शगल था.

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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से संबंध

अमन साव के संबंध इंटरनेशनल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से भी थे. दोनों साथ में काम कर रहे थे. लॉरेंस बिश्नोई से ही अमन साव को अत्याधुनिक हथियार मिल रहे थे और वे दोनों एक दूसरे की मदद रंगदारी वसूलने और हत्या जैसे अपराधों को अंजाम देने में कर रहे थे.

कौन था अमन साव? 

अमन साव रांची जिले के ठाकुरगंज इलाके के मतवे गांव का रहने वाला वाला था. उम्र 30 के अंदर ही होगी, यानी अमन साव काफी कम उम्र से ही अपराध की दुनिया की में अपने पैर जमा चुका था. अमन साव का पैतृक गांव मतवे में है, लेकिन उसके पिता पतरातू में कारोबार करते थे, इसलिए वह पतरातू में ही रहता था. यहीं पर उसने महज 17 साल की उम्र में बर्नपुर सीमेंट फैक्टरी में फायरिंग की थी, जिसके बाद वह दस महीने तक जेल में रहा था. जेल  से बाहर आने के बाद उसने 12वीं तक की शिक्षा पूरी की और डिप्लोमा भी किया. जिसके बाद उसने एक मोबाइल दुकान भी खोला था, यहीं से उसका संपर्क सुशील श्रीवास्तव गैंग के अपराधियों से हुआ वह उसने अपराध की दुनिया में इस तरह कदम रखा कि फिर मुड़कर नहीं देखा.

कहां–कहां तक फैला था नेटवर्क

अमन साव के अपराध का नेटवर्क झारखंड के धनबाद, रांची, रामगढ़, चतरा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार और बोकारो तक फैला था. कुछ समय पहले उसे रायपुर के तेलीबांधा में फायरिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिससे यह स्पष्ट है कि उसका कारोबार झारखंड के बाहर भी फैल गया था. लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में आने से उसका कारोबार अन्य राज्यों तक पहुंच गया था.

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