दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ के कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग, पढ़ें,पूरी कहानी

Martial Law In Korea : दक्षिण कोरिया में एक बार फिर लोकतंत्र के समर्थन में आवाज बुलंद हुई है और प्रदर्शन का दौर जारी है. मंगलवार की रात जब राष्ट्रपति यूं सुक येओल ने देश में मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की, तो एकबारगी लोगों को भरोसा नहीं हुआ, क्योंकि वे अब मार्शल लॉ को इतिहास की चीज मानने लगे थे. 1980 में दक्षिण कोरिया ने अंतिम बार मार्शल लॉ देखा था. उसके बाद देश सैन्य तानाशाही से लोकतंत्र की ओर बढ़ गया. हां, ग्वांगजू शहर में 200 लोकतंत्र समर्थकों जिनमें ज्यादातर विश्वविद्यालय के छात्र थे, उनकी कुर्बानी देनी पड़ी थी.

By Rajneesh Anand | December 4, 2024 8:32 PM

Martial Law In South Korea : दक्षिण कोरिया के बेहद अलोकप्रिय माने जाने वाले राष्ट्रपति यूं सुक येओल ने मंगलवार रात देश में मार्शल लॉ लगाने की घोषणा करके देशवासियों के साथ ही पूरे विश्व को भी चौंकाने का काम किया. हालांकि येओल द्वारा लगाए गए मार्शल लॉ को कुछ ही घंटों में संसद ने हटा दिया. लेकिन इस कुछ घंटे के मार्शल लॉ ने पूरे देश में उथल-पुथल मचा दी है. अचानक से लोगों को तानाशाही दौर की याद आई, जिसे वे भुला बैठे थे. लोकतंत्र के समर्थकों ने नेशनल असेंबली के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया है और राष्ट्रपति यूं सुक येओल से पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं.

यूं सुक येओल ने मार्शल लॉ (Martial law) क्यों लागू किया?

मार्शल लॉ लागू होने के बाद सेना सड़कों पर उतरी

दक्षिण कोरिया का राष्ट्रपति राज्य प्रमुख के रूप में कार्य करता है, लेकिन नेशनल असेंबली के पास कानून बनाने और उसे पारित करने का अधिकार है. इस वजह से राष्ट्रपति और नेशनल असेंबली के बीच सामंजस्य होना बहुत जरूरी है. लेकिन दक्षिण कोरिया में 2022 के चुनाव में विपक्ष को भारी जीत मिली, जिसकी वजह से राष्ट्रपति और नेशनल असेंबली के बीच टकराव की स्थिति बन गई है. राष्ट्रपति के लिए कानूनों को पारित करवाना मुश्किल हो गया है. उसपर विपक्ष उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराने की तैयारी में जुटा था. यूं सुक येओल की पत्नी के खिलाफ भी जांच बैठाने की तैयारी हो रही है. बस इन्हीं बातों से बचने के लिए यूं सुक येओल ने देश में मार्शल लॉ लगाने की घोषणा कर दी. उनकी इस घोषणा का उनकी अपनी ही पार्टी रूढ़िवादी पीपुल्स पावर पार्टी के नेताओं ने विरोध किया और मार्शल लॉ लगाए जाने को गलत और संवैधानिक बताया.

क्या होता है मार्शल लॉ (Martial law) 

1980 में लोकतंत्र समर्थकों का प्रदर्शन

दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लगाए जाने का अर्थ है सरकार को बदलना. मार्शल लॉ लगाए जाने के बाद सेना का शासन स्थापित हो जाता है और सभी नागरिक अधिकारों को स्थगित कर दिया जाता है.  सेना के इस शासन में लोगों के लिए नागरिक कानूनी प्रक्रियाओं को भी स्थगित या निलंबित कर दिया जाता है. नागरिकों की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सेना का शासन होता है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल ने मंगलवार तीन दिसंबर की देर रात को अपने टेलीविजन संबोधन में इस बात की जानकारी दी कि देश में मार्शल लॉ लगाया जा रहा है. उन्होंने विपक्षपर देश विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि वे उत्तर कोरिया के साथ सहानुभूति रखते हैं. येओल ने अपने संबोधन में कहा कि वे मार्शल लॉ के जरिए कोरिया गणराज्य का पुनर्निर्माण करेंगे और देश की सुरक्षा करेंगे, जो बर्बादी के कगार पर आ पहुंचा है. उन्होंने जनता से यह अपील की-‘ आपको कुछ असुविधा होगी, लेकिन उन्हें सहन कर लें क्योंकि मैं देश का नवनिर्माण करने में जुटा हूं, ताकि वह सुरक्षित और मजबूत बन सके.’

Also Read : Integration of 565 Princely States : कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एक करने की राह में बाधा था माउंटबेटन प्लान

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

 पाकिस्तान में शिया और सुन्नी एक दूसरे के खून के प्यासे, ये है जंग की वजह

मार्शल लॉ (Martial law) पर देश में कैसी हुई प्रतिक्रिया?

दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ के कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग, पढ़ें,पूरी कहानी 4

राष्ट्रपति यूं सुक येओल ने दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लागू किया, तो पूरे देश में उसपर गंभीर प्रतिक्रिया सामने आई. यहां तक कि उनकी अपनी ही पार्टी के नेताओं ने इसे असंवैधानिक बता दिया. नेशनल असेंबली में सांसदों को जाने से रोका गया, तो वे खिड़की से कूदकर अंदर गए और 190 सांसदों ने मार्शल लॉ के खिलाफ मतदान किया, जिसके बाद राष्ट्रपति को भी मार्शल लॉ हटाने के लिए बाध्य होना पड़ा. मार्शल लॉ लगते ही हजारों लोग संसद के सामने जमा हो गए और इस कानून को हटाने की मांग करने लगे थे. अब विपक्ष राष्ट्रपति येओल के खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव लेकर आया है, जिसपर शुक्रवार या शनिवार को मतदान होने की संभावना है.

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति को हटाने की क्या है प्रक्रिया?

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है. नेशनल असेंबली में कुल 300 सदस्य हैं और राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पारित करने के लिए 200 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. नेशनल असेंबली में अभी विपक्ष के पास कुल 192 सांसद हैं, इस स्थिति में यूं सुक येओल के खिलाफ महाभियोग तभी चलाया जा सकता है, जब उनकी पार्टी के भी कुछ सांसद राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग का समर्थन करें. महाभियोग का प्रस्ताव अगर पारित हो जाता है तो उसे कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा. अगर नौ में से छह जज प्रस्ताव के पक्ष में रहे, तो महाभियोग चलाने की प्रक्रिया आगे जारी रहती है. महाभियोग के 60 दिनों के अंदर नया राष्ट्रपति चुनने के लिए चुनाव कराने होंगे. तब तक शासन की बागडोर प्रधानमंत्री के हाथों में रहेगी.

Also Read :Assisted Dying Bill : अब मांगने से मिलेगी मौत, सांसदों ने उठाया ऐतिहासिक कदम

FAQ क्या होता है मार्शल लॉ

मार्शल लॉ लगाए जाने का अर्थ है सरकार को बदलना. मार्शल लॉ लगाए जाने के बाद सेना का शासन स्थापित हो जाता है और सभी नागरिक अधिकारों को स्थगित कर दिया जाता है.  सेना के इस शासन में लोगों के लिए नागरिक कानूनी प्रक्रियाओं को भी स्थगित या निलंबित कर दिया जाता है. नागरिकों की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सेना का शासन होता है.

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति को पद से कैसे हटाया जाता है?

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग का प्रस्तान नेशनल असेंबली से पास करना होता है. इसके लिए 300 सदस्यीय सदन में 200 यानी दो तिहाई सदस्यों की सहमति चाहिए होती है. उसके बाद कोर्ट में मामला जाता है जहां नौ में से छह जज की सहमति मिलने के बाद महाभियोग चलाया जाता है.

Next Article

Exit mobile version